18 February 2015

आलस से बचिए।


     समय बचाने के लिए आपको आलस से बचना चाहिए।  जब भी सामने कोई मुश्किल काम आता है, तो हम आलस करने लगते है और उसे टाल देते है।  लेकिन टालमटोल करने के अलावा भी आलस के कई कारण होते हैं।  आलस का एक अहम कारण वह  है, जिसे अधिकांश लोग अनदेखा कर देते है :- जरुरत से ज्यादा भोजन करना।

     जब आप आवश्यकता से अधिक भोजन करते है या ज्यादा तला-भुना भोजन करता है, तो आपकी ऊर्जा में कमी आ जाती है और आपकी एकाग्रता में बाधा आती है।  आलस में ज्यादा गलतियाँ करते है और टालमटोल करने या फिर जैसे-तैसे काम निबटाने के चक्कर में रहते है।  इससे आपके काम की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।  यदि आप शरलॉक होम्स के दीवाने है, तो ये बात आपको जल्दी समझ आ जाएगी, क्योंकि जब शरलॉक होम्स कोई जटिल समस्या सुलझाने में जुटता था, तो खाना-पीना छोड़ देता था।  उसका मानना था कि भोजन करने के बाद ख़ून का प्रवाह पेट की तरफ हो जाता है, जिससे दिमाग़ के काम करने की रफ़्तार धीमी हो जाती है।

     यह स्पष्ट समझ लीजिये कि यहाँ भोजन करने में लगने वाले समय की बात नहीं हो रही है, ज्यादा भोजन करने के परिणामों की बात हो रही है।  भोजन करने में तो कम समय लगता है, लेकिन भोजन के कारण उत्पन्न आलस के कारण ज्यादा समय बर्बाद होता है।  क्या आपने कभी देखा है कि दिन में खाना खाने के बाद विद्यार्थियों को नींद के झोंके आने लगते हैं रात को अगर ज्यादा खाना खाले लें, तो सीधे बिस्तर पर जाने की इच्छा होती है ?  आपने ख़ुद भी महसूस किया होगा कि रेस्तरां में या किसी विवाह समारोह में भोजन करने के बाद आपको पेट भारी लगता है और आप जल्दी से जल्दी सो जाना चाहते हैं।

     क्या आपने कभी सोचा है कि हम सुबह सबसे अच्छी तरह काम क्यों कर सकते हैं ?  एक कारण तो यह है कि उस समय आराम कर लेने के बाद शरीर थका हुआ नही रहता है।  दूसरा कारण यह है कि सुबह oxygen ज्यादा रहता है और तीसरा कारण यह है कि उस वक़्त हमारा पेट खाली होता है।  पेट खाली रहने से दिमाग़ ज्यादा तेज़ी से चलता है, इसलिए हमें एक ही बार में ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए, ताकि हम पर आलस सवार न हो।  नियमित अंतराल पर कम आहार ग्रहण करना स्वास्थ केलिए सबसे अच्छा माना जाता है।  जब आप कम खाते है, तो आपको आलस नही आता और आपकी ऊर्जा व् एकाग्रता का स्तर बना रहता है।

     आलस के कारण इंसान अपने महत्त्वपूर्ण काम नहीं कर पाता है, इसलिए अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखिये और आलस नाम के महा रोग से बचिए।

                   आलस मीठा होता है, लेकिन इसके परिणाम बेरहम होते हैं। 
                                                   - जॉन क्विन्सी एडम्स 

यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !

17 February 2015

सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले करिए।


     अक्सर हमारी दिनचर्या इस तरह की होती है कि हमारे सामने जो काम आता है, हम उसे करने लग जाते है और इस वजह से हमारा सारा समय छोटे छोटे कामों को निपटाने में ही चला जाता है।  हमारे महत्त्वपूर्ण काम इसलिए नही हो पाते, क्योंकि हम महत्त्वहीन कामों में उलझे रहते है।  महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति को इस बात में सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि सफ़लता पाने केलिए ये आवश्यक है कि महत्त्वपूर्ण काम पहले किये जाए।  हमेशा याद रखे कि सफ़लता महत्त्वहीन नही, बल्कि महत्त्वपूर्ण कामों से मिलती है, इसलिए अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट रखें और अपना समय महत्त्वहीन कामो में न गवाएं।

समय के संबंध में अपनी प्राथमिकताएं तय करने का एक उदाहरण देखिये -

     'एक मशहूर संगीतज्ञ जब वायलिन बजाना सीख रही थी, तो उन्होंने पाया कि उनकी प्रगति संतोषजनक नहीं है।  कारण खोजने पर उन्हें पता चला कि संगीत का अभ्यास करने से पहले घर साफ करने, सामान व्यवस्थित करने, खाना पकाने आदि कार्यों में उनका बहुत समय लग जाता है, इसलिए उन्हें वायलिन सीखने के लिए कम समय मिल पाता है।  यह जानने के बाद उन्होंने संकल्प किया कि क्योंकि संगीत उनके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है, इसलिए वे सबसे पहले संगीत का अभ्यास करेंगी, बाकी सारे काम उसके बाद करेंगी।  खुद को इस तरह अनुशासित करने के बाद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की, क्योंकि अब वे अपना सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले कर रही थी।'

     इस उदहारण से यह स्पष्ट हो जाता है कि हर महत्वा कांशी व्यक्ति को अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले करने चाहिए, लेकिन इसके लिए उसे यह पता लगाना होगा कि सबसे महत्त्वपूर्ण काम है कौन से।  उनके पास उनकी प्राथमिकताओ की स्पष्ट योजना होना चाहिए।  ऐसा करना बहुत ही आसान है।  एक डायरी में ए (A), बी (B) और सी(C) शीर्षक के तीन कॉलम बना लें।  ए (A) कॉलम में अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम रखें, जिन्हें आप अनिवार्य मानते हैं।  बी (B) कॉलम में ऐसे काम रखें जो अनिवार्य तो नहीं हैं, परंतु महत्वपूर्ण हैं।  सी (C) कॉलम में ऐसे सामान्य काम रखें, जो न तो अनिवार्य हैं, न ही महत्त्वपूर्ण।

     


 दिनांक :-
ए (अनिवार्य कार्य )    बी (महत्वपूर्ण कार्य)       सी (सामान्य कार्य )
 1.                               1.                                1.
 2.                               2.                                2.
 3.                               3.                                3.

     दिन में सब से पहले ए कॉलम के पहले काम यानी ए1 काम से करें, जो सबसे अनिवार्य काम होगा।  उसे पूरा करने के बाद आप इसी कॉलम के दूसरे काम करने में जुट जाए और इस तरह ए कॉलम के सारे काम निपटा लीजिये।  ए कॉलम के बाद बी कॉलम के काम शुरू करिए और इसके बाद समय बचने पर ही सी कॉलम के कामों की ओर जाए।

     महत्त्व के क्रम में अपनी प्राथमिकताओ की कार्य सूची बनाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।  हमें रॉबर्ट जे. मैकैन की यह बात हमेशा याद रखना चाहिए, 'अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न हो पाने का कारण यह है कि हम छोटी चीजों को पहले करने में अपना समय बर्बाद कर देते है।' 

यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !

16 February 2015

सुबह जल्दी उठिए।


  सुबह का पहला घंटा पुरे दिन की दिशा तय करता है
                                      - हेनरी वार्ड बीचर

     'जो जल्दी सोते है,जल्दी उठते है, उनके पास स्वास्थ, पैसा और बुद्धि रहती है।'  इस कहावत को आज जितना नजर अंदाज किया गया है, उतना किसी दूसरी कहावत को नही किया गया।  यह बात मै अनुभव से जानता हू।  कभी मै भी रात को २-३ बजे सोकर सुबह ८-९ बजे उठता था और अगर आप आधी रात के बात सोते है, तो आप भी मेरी ही श्रेणी में आते है।  time management की दॄष्टि से यह बिलकुल ही गलत है, क्योंकि सुबह देर से उठने पर आपके पास दूसरे कामों के लिए तो समय रहता है लेकिन अपने लिये समय नहीं रहता है।

     लोग यह तर्क दे सकते है कि सुबह उठना बूटो की बात नहीं है, रात की शांति में काम ज्यादा अच्छी तरह होता है और रात को वे चाहे जितनी देर तक काम कर सकते है।  लेकिन तर्क लचर है।  सुबह ४ बजे उठने पर भी शांति ही रहती है और उसमें काम अपेक्षा कृत ज्यादा अच्छी तरह होता है। मुख्य बात यह है कि उस समय काम की गति भी तेज़ होती है, क्योंकि शरीर और दिमाग़ दोनों भी तरो ताज़ा होते है।  रात के वातावरण में oxygen की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए आपका दिमाग़ कम चल पाता है और दिमाग़ी काम के लिए रात का समय आदर्श नहीं होता।  आदर्श समय तो सुबह का ही रहता है, जब वातावरण oxygen से भरपूर रहता है।  यकीन न हो, तो सुबह ६ बजे और शाम ६ बजे उसी सड़क पर घूम कर देख लीजिए।

     एक बात जान लीजिए, समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग में सबसे बड़ी दिक्क़त दूसरों की तरफ़ से आती है और सुबह यह दिक्कत सबसे कम होती है,इसलिए सुबह के १ घंटे में आप जितना काम कर लेते है, उतना दोपहर में ३ घंटे में हो पाएगा।  सुबह mobile का tension भी नहीं रहता, अख़बार भी देर से आता है, बच्चे भी देर से उठते है, इसलिए आप पूरी एकाग्रता से काम कर सकते है। 

     आदर्श स्थिति में तो नियम यह है कि सूरज उगने से २ घंटे पहले उठे और सूरज डूबने के २ घंटे बाद सो जाए।  जब आप सुबह ४ बजे उठते है, तो आपके पास समय ही समय रहेगा।  ऑफिस जाने से पहले भी आपके पास ४-५ घंटे का समय रहेगा।  इस दौरान आप व्यायाम कर सकते है, पुरे दिन की योजना बना सकते है और अपने महत्त्वपूर्ण काम निपटा सकते है।  दूसरी ओर, जल्दी सोने की आदत से भी आप बहुत समस्याओं से मुक्ति पा लेते है।  आपको देर रात की पार्टिओ से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा, आपकी जीवन शैली ज्यादा स्वस्थ हो जाती है।

     हमारे पूर्वजों की जीवनशैली ज्यादा स्वस्थ इसलिए थी, क्योंकि वे प्रकृति के करीब थे।  वे न सिर्फ प्राकृतिक वातावरण में रहते थे, बल्कि प्रकृति की लय में कार्य करते थे।  सुबह का वातावरण इतना पवित्र और शांत रहता था कि ऋषि-मुनि ब्रह्म मुर्हुत में भजन-पूजन करते थे।  वे मुर्गे की बाँग के साथ उठते थे और चाँद निकल ने पर सो जाते थे।  इस तरह वे अपने शरीर को प्रकृति के सांमजस्य में रख रहे थे।  आज आधुनिकता की होड़ में कृत्रिमता का माहौल इतना बढ़ चूका है कि प्रकृति से मनुष्य का सारा संपर्क ही टूट चूका है।  रात को देर तक जागने से मनुष्य की प्राकृतिक लय ख़त्म हो जाती है और वह सुबह देर से उठता है।  नतीजा यह होता है कि उसका हाजमा ख़राब होता है, कब्ज़ की शिकायत रहती है, ताज़गी और स्फूर्ति का अभाव होता है और दिन भर उसके शरीर में आलस भरा रहता है।


यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !

14 February 2015

मनुष्य का भाग्य स्वयं मनुष्य के हाथ में ही होता है।


     एक समय की बात है -
     एक बार एक गुरूजी कक्षा में सभी छात्रों को पढ़ा रहे थे कि मनुष्य का भाग्य स्वयं मनुष्य के हाथ में ही होता है।  आप जैसे सोंच रखेंगे, या फिर जैसे कर्म करेंगे आप वैसे ही बन जाएंगे।  ये life सभी को एक-समान उपलब्धियां (opportunity) देती हैं, लेकिन ये सब आप पर निर्भर करता है कि आप अपने opportunity का इस्तेमाल कैसे करते हैं।

गुरूजी का मनुष्य का भाग्य बदलने वाला एक उदाहरण -
     गुरूजी ने सभी छात्रों के सामने एक प्रयोग किया।  उन्होंने तीन कटोरे लिए और एक में आलू, दूसरे में अंडा और तीसरे में चाय की पत्ती डाल दी।  अब तीनों कटोरों में पानी डालकर उनको गैस पर उबलने के लिए रख दिया। सभी छात्र ये सब ध्यानपूर्वक देख रहे थे, लेकिन उनकी समझ में कुछ भी नहीं आ रहा था।  २० मिनट के बाद जब तीनों बर्तनो में उबाल आने लगा तो गुरूजी ने सभी कटोरों को नीचे उतार दिया और आलू, अंडा और चाय को बाहर निकाल कर उनके सामने पेश किया।  अब गुरूजी ने सभी छात्रों से तीनों चीजों को गौर से देखने के लिए कहा लेकिन कोई भी छात्र  इस बात को समझ नहीं पा रहे थे।

     अंत में गुरु जी ने ही एक छात्र को बुला कर उसे तीनों चीजों (आलू, अंडा और चाय) को हाथ लगाने के लिए कहा।  जब छात्र ने आलू को हाथ लगाया तो ये महसूस किया कि जो आलू पहले काफ़ी कठोर था, लेकिन अब वह पानी में उबलने के बाद काफ़ी मुलायम हो गया है।  अब अंडे को उठाया तो देखा, जो अंडा पहले बहुत नाज़ुक था अब कठोर हो गया है।  अब चाय के कप को उठाया तो देखा, चाय की पत्ती ने गर्म पानी के साथ मिलकर अपना रंग बदल लिया और अब वह चाय बन चुकी थी।

इसी तरह गुरु जी ने उन सबको समझाया- 
     हम ने तीनों को एक समान पानी में उबाला था लेकिन बाहर आने पर तीनों चीज़ें एक जैसी नहीं मिली।  क्योंकि आलू जो कठोर था वो मुलायम हो गया, अंडा पहले से ज्यादा कठोर हो गया और चाय की पत्ती ने भी अपना रंग बदल दिया, इसी संदर्ब की तरह यही बात मनुष्य पर भी लागू होती है।  एक मनुष्य मुसीबतों में अपना धैर्य खो देता है और वहीं दूसरा बुद्धिमान मनुष्य मुसीबतों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को हासील कर लेता है।

     तो  friends, इसी तरह विधाता भी सभी को समान अवसर (opportunity) और मुसीबतें प्रदान करते हैं, लेकिन ये पूरी तरह हम पर depend करता है कि हम कैसा बनाना चाहते हैं और किस तरह हम अपने जीवन के लक्ष्य को सफ़ल बनाते हैं।

                                                 !!!! ALL THE BEST  !!!!


यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !
 

13 February 2015

कर्म में जुट जाए।


                           समय की रेत पर कदमों के निशान बैठकर नही बनाए जा सकते।
                                                                          - कहावत

     बेहतरीन लक्ष्यों और सर्वश्रेष्ठ योजनाओं के बावजूद आप असफल हो सकते है, बेशर्ते आप उन पर आप अमल न करे।  कर्म ही वह जादुई तत्व है, जो आपको स्थायी सफ़लता दिलाता है।

     हम सब जानते है कि बिना मेहनत किये हम सफ़ल नही  हो सकते, परन्तु आष्चर्यजनक बात यह है कि इसके बावजूद हम मेहनत से जी चुराते है, काम को टालते रहते है, मूड ना होने का बहाना बनाते है, समय या संसाधन की कमी का तर्क देते है यानि ,काम करने के अलावा सब कुछ करते है।  इस संदर्भ में तुलसीदास जी के इस दोहे को याद रखिए, 'सकल पदारथ है जग माहीं।  करमहीन नर पावत नाही।'  यानी इस संसार में सारी चीज़ें हासिल की जा सकती है, लेकिन वे कर्महीन व्यक्ति को नही मिलती है।   

      काम से जी चुराने का मुलभुत कारण यह है कि हम स्वभाव से आलसी होते है और हमारा मन हमें मनोरंजन या आनंद की आकर्षक राह की तरफ़ खींचता है।  हम यह भूल जाते है कि सफ़लता की राह मुश्किलों से भरी होती है, जिस पर चलने का श्रम करने के लिए हमें अपने मन पर काबू पाना होगा, अपनी इच्छा शक्ति को दृढ़ करना होगा और लक्ष्य की तरफ लगातार बढ़ना होगा।  हम यह भी भूल जाते है कि सफल व्यक्ति अपने मूड के दास नही बल्कि उसके स्वामी होते है। 

      इस संबंध में सबसे अच्छी सलाह यह है, 'कोई काम शुरू करते समय अपने मूड से सलाह न ले।'  यानि अपने मूड के हिसाब से नही, बल्कि अपने लक्ष्य और योजना के अनुसार काम करें।  विश्वविख्यात नाटक कार जॉर्ज बनार्ड शॉ का कही बार लिखने का मूड नही होता था।  लेकिन मूड हो या ना हो लेकिन वे लिखते थे, क्योंकि उन्होंने महान साहित्य कार बनने के अपने लक्ष्य को कभी अपनी नज़रों से ओझल नहीं होने दिया।  अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने संकल्प किया कि वे हर दिन ५ पेज लिखेंगे, चाहे उनका मूड कैसा भी हो।

     अगर आप भविष्य में सफलता की फ़सल काटना चाहते है, तो आपको उसके लिए बीज आज बोने होंगे।  अगर आप आज बीज नही बोएंगे, तो भविष्य में फ़सल काटने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ?  पूरी सृष्टि कर्म और फल के सिद्धांत पर चलती है, इसलिए आपको अपने कर्म के अनुपात में ही फल मिलेंगे।

     यदि आप सफलता चाहते है, तो कर्म में जुट जाए और तब तक जुटे रहें, जब तक कि आप सफल न हो जाए।  यदि आप समय का सर्वश्रष्ठ उपयोग करना सीख लेते है, तो आगे चल कर समय आपको वह वस्तु दे देगा, जिसे आप प्रबलता से चाहते है - सम्मान, सफलता, धन, सुख, या फिर जो भी आप चाहते है।


यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !
 

12 February 2015

कुछ विचार आप सभी के लिए।


1. अपने विचारों पर ध्यान दे, वे आपके शब्द बन जाते है।  अपने शब्दों पे ध्यान दे वे आपके क्रियाये बन जाते है।  अपनी क्रियाओं पर ध्यान दे वे आपकी आदते बन जाती है।  अपनी आदतों पर ध्यान दे वे आपका चरित्र बन जाती है।

2. लाभ कोई बुरा शब्द नही है।

3. केवल अस्तित्व के लिए नही बल्कि जीने के लिए जिए।

4. partnership टूटने के लिए ही बनाई जाती है।

5. पुराने रिकॉर्डों में और पत्रों में से ९०% की कभी भी आवश्यकता नही पड़ती।

6. कोई एक रास्ता पक्का नही है, जिस अनुसार आप निर्णय ले सके, इसलिए हर एक रास्ता अपनाए।
शिकायतें एक तरह का सुझाव होती है।

7. बजट एक चुनौती है।

8. computer केवल विष्वसनीय और आज्ञाकारी है।

9. काग़ज़ एक लेखन सामग्री है, वह अपने आप काम नहीं करता।

10. काम करने वाले के लिए काम कभी ख़त्म नही होता, हमेशा एक नया काम तैयार रहता है।

11. भविष्य की उन्नति केलिए वर्तमान का सदुपयोग करने को तैयार रहें।

12. शिक्षा में जीवन की हर प्रकार की स्थितियों का सामना करने की योग्यता है।

13. शिक्षा का महत्वपूर्ण लक्ष्य ज्ञान नही बल्कि व्यावहारिकता है।

14. ज्ञान और लकड़ी का इस्तेमाल बिना मौसम या मौके से ज्यादा नही करना चाहिए।

15. पक्षी तालाब से पानी पीते है परन्तु उसे खाली नही कर सकते।

16. कल्पना ज्ञान से अधिक ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।

17. किसी चीज़ को पूरी तरह जानने के बाद ही सीखने का कोई अर्थ है।

18. ऐसी चीजें याद रखना बेवकूफी है, जो बाद में आपको भूल जानी पड़े।

19. व्यावहारिक ज्ञान को अपना सर्वोत्तम मित्र बनाएँ।

20. या तो मै कोई रास्ता ढूंढूंगा या फिर बना लूंगा।

21. कचरा अंदर डाले तो कचरा ही बाहार निकलेगा।

22. जहा सुई जाती है वहा धागा भी जाता है।

23. पयोग की जा रही चाबी हमेशा चमकदार रहती है।

24. अनंत प्रसन्नता के लिए अपने सुनहरी पेन और जुबान का प्रयोग करें।

25. व्यापार ठीक साइकिल चलाने जैसा है, या तो आप चलते रहते है या फिर गिर जाते है।  इन दोनों के बीच की कोई स्थिति नही है।

26. लाभ के बारे में जितना हो सके देर से सोचें, खर्चो के बारे में जितना हो सके जल्दी सोचें।      

27. अगर सभी संभव रुकावटों को पहले ही ख़त्म कर दिया जाए, तो करने केलिए कोई काम नही रहेगा।

28. अपने ग्राहक या कर्मचारी के लिए प्रतिदिन एक अच्छा काम करके एक नायक की तरह महसूस कीजिए।

29. खुशी को ढूंढ़ना परछाई को पकड़ने या हवा का पीछा करने जैसा है।

30. प्रतिभा से धन कमा जा सकता है, लेकिन धन से प्रतिभा नहीं।      



यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !
 

11 February 2015

स्वयं को व्यवस्थित करें


     अव्यवस्थित जीवन हमारे सामने कई मुश्किलें खड़ी कर देता है।  इनमें से एक मुश्किल यह है कि हमारा समय न चाहते हुए भी अनावश्यक रूप से बर्बाद होता है और दुःखद बात यह है कि हम खुद इस के लिए दोषी है है।

     इसलिए समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग का यह सिद्धांत है - खुद को व्यवस्थित करिए।

     अव्यवस्था का सबसे आम उदाहरण है किसी काग़ज़ या फाइल का न मिलना।  अनुमान है कि ऑफिस में काम करने वाले लोग किसी कागज़ या फाइल को खोजने में हर दिन लगभग ३० मिनिट बर्बाद करते है।  आलस या जबरदस्ती के कारण हम किसी चीज़ को सही जगह पर नही रखते और फिर उसे खोजने में ऑफिस या घर को अस्त-व्यस्त कर देते है।  अंत में हमें किसी ऐसी जगह पर मिलती है, जहा उसे रखा ही नहीं जाना चाहिए था।

     अव्यवस्था का और एक रूप है बीमारी।  असंतुलन भोजन, अनियमित नींद, चिंता, तनाव और हानिकारक आदतों की वजह से अक्सर हम खुद ही बीमारी को आमंत्रित करते है।  समय का सर्वश्रेठ उपयोग करने केलिए हमें व्यवस्थित जीवन जीना चाहिए, ताकि बीमारी हमसे दूर ही रहे।  हमें यह याद रखना चाहिए कि बीमारी की वजह से हमारे कई दिन बर्बाद हो सकते है, क्योंकि इस दौरान हम कोई रचनात्मक या चुनौतीपूर्ण कार्य करने की स्थिति में नही होते है।  बीमारी की वजह से समय की बर्बादी दुःखद है, क्योंकि संतुलन आहार या नियमित व्यायाम द्वारा अधिकांश बीमारियों से बचा जा सकता है।

     अव्यवस्था का एक और रूप है आवश्यकता से अधिक या कम भोजन करना।  अधिक भोजन करने के बाद हम सुस्त पद जाते है, हमारी एकाग्रता और ऊर्जा में कमी आ जाती है, जिस वजह से हमारा काम अच्छी तरह से नही हो पाता है।  दूसरी तरफ, जरुरत से कम भोजन करना भी ठीक नही है, क्योंकि ऐसा करने पर हमें कमज़ोरी या सिरदर्द होने लगता है, हम जल्दी थक जाते है, चिड़चिड़े हो जाते है, और इस वजह से अपने काम को पूरी एकाग्रता या शक्ति से नही कर पाते है।

     अव्यवस्था का एक और रूप है अनावश्यक चर्चा, चाहे वह चर्चा प्रत्यक्ष हो या अप्रत्यक्ष ( जैसे की फोन पर ) ।  फोन पर चर्चा करने से पहले यदि हमारे पास आवश्यक बातों की बिंदुवार योजना हो, तो चर्चा सार्थक होती है।  परन्तु अगर हम फोन पर गैर-जरुरी बाते करते रहे और जरुरी बाते भूल जाए, तो निशचित रूप से यह लापरवाही का सूचक और समय की बर्बादी का उदहारण है।         

          अव्यवस्था का एक और सादा उदाहरण है बिना appointment लिए किसी से मिलने चले जाना।  यदि अपने appointment नही लिया है, तो हो सकता है की आपका समय बर्बाद हो।  यह भी होसकता है कि सामने वाला आपसे मिले ही नही और आपके आने-जाने का पूरा समय बर्बाद हो जाये।

     यह भी ध्यान रखे कि अगर आपकी दिनचर्या व्यवस्थित है तो आपका जीवन भी व्यवस्थित होगा और जब आपका जीवन व्यवस्थित होगा तो आप सहजता से समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर पायेंगे।     
    

यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !
 

7 February 2015

टाइम टेबल बनाइये।



हमारे पास समय की सबसे ज्यादा कमी होती है, लेकिन इसी का हम सबसे ज्यादा दुरूपयोग करते हैं।
                                                                                                             
     जिस तरह पैसे की बर्बादी को रोकने के लिए बजट बनाना जरुरी है, उसी तरह समय की बर्बादी को रोकने केलिए टाइम टेबल बनाना जरुरी है।

     इसलिए समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग का सिद्धांत है :- टाइम टेबल बनाएँ।

आपका टाइम टेबल २ तरह का हो सकता है :-
१. पूर्ण टाइम टेबल
२. संक्षिप्त टाइम टेबल

पूर्ण टाइम टेबल :-

     पूर्ण टाइम टेबल में आप पुरे २४ घंटे की योजना बनाते है, जबकि संक्षिप्त टाइम टेबल में आप सिर्फ सीमित समय की योजना बनाते हैं।

आइये, पूर्ण टाइम टेबल का example देखें  :-

८ घंटे :-  नींद और स्नान में जाता है।
२ घंटे :-  नास्ता, lunch, dinner, चाय-कॉफ़ी etc. में जाता है।
२ घंटे :- अख़बार,t.v, सीरियल, न्यूज़,पुस्तकें में जाता है।        
१ घंटा :- ऑफिस आना जाना, यात्रा में लगता है
१ घंटा :- सामाजिक जीवन में जाता है।
२ घंटा :- पारिवारिक जीवन में जाता है।
८ घंटा :- कामकाज, नौकरी या बिज़नेस में जाता है।  

संक्षिप्त टाइम टेबल :-

     संक्षिप्त टाइम टेबल में आप पूरे दिन की योजना नही बनाते, सिर्फ अपने कामकाज़ या बिज़नेस के घंटो की योजना बनाते है।  मान लीजिए कि आप हर दिन ८ घंटे काम करना चाहते है।  इस स्थिति में आप ख़ुद से कहते है, 'मै सुबह ९ बजे से दोपहर १ बजे तक और २ बजे से शाम ६ बजे तक काम करुँगी/करूँगा।    

     आपके टाइम टेबल में बाकी कामों की कोई योजना नहीं होती।  इसमें सिर्फ आपके काम के समय की योजना होती है।  यदि किसी दिन या किसी सप्ताह आपके पास जरूरत से ज्यादा काम होता है, तो उसे पूरा करने केलिए आप अपने टाइम टेबल में एक-दो घंटे का समय बढ़ा लेते है।  ऐसी स्थिति में आप खुद से कहते है, ' मै सुबह ९ बजे से दोपहर १ बजे तक और दोपहर २ बजे से शाम को ७ या ८ बजे तक काम काम करूँगा/करुँगी।

     संक्षिप्त टाइम टेबल बनाना और उसका पालन करना आसान है या शुरुवात में अच्छा है।  यह व्यवसायिक लक्ष्य हासिल करने का बेहतरीन तरीका है।   फिलाल, इस बात का ध्यान रखें कि संक्षिप्त टाइम टेबल आपको सिर्फ  एक दिशा में सफ़लता दिलाता है, जबकि पूर्ण टाइम टेबल जीवन के हर क्षेत्र में सफलता दिलाता है क्योकि वह संतुलन और संपूर्ण होता है।

                                      " सारा समय-प्रबंधन योजना से शुरू होता है।"
                                                                      - टॉम ग्रीनिंग         



यदि आपके पास भी Hindi में कोई article, inspirational story या जानकारी है जो आप हमारे साथ share करना चाहते हैं तो कृपया उसे अपनी फोटो के साथ E-mail करें. हमारी Id है - safalbhariudaan@gmail.com.पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और फोटो के साथ यहाँ PUBLISH करेंगे. Thank You !
 

Sign Up


नयी पोस्ट ईमेल में प्राप्त करने के लिए Email SignUp करें

BEST OF SAFALBHARIUDAAN.COM