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24 February 2015

अच्छी पढ़ाई के लिए अच्छी नींद आवश्यक है।


     क्या मुझे देर रात पढ़ना चाहिए या सुबह जल्दी उठ कर पढ़ने की आदत डाल लेनी चाहिए ?  एक student के लिए कितने घंटे की नींद काफी होती है ?  परीक्षा के दिनों में सोने के समय में कटौती करने से वाकई में कोई फायदा होता है ?  क्या दोपहर में एक नींद ले लेनी चाहिए ?

     हमें इस प्रशनो का सही उत्तर पता होना चाहिए ताकि अच्छी तरह से अपनी पढाई कर सके।  नींद के महत्त्व को जानने के लिए इन बातो को समझना जरुरी है। 

नींद आवश्यक प्रोटीन बनाती है :-

     नींद के दौरान दिमाग के सभी भाग आराम नही करते दिमाग के कुछ निशचित भागों में इलेक्ट्रिकल क्रियाकलाप, ऑक्सीजन उपभोग और ऊर्जा व्यय होते है।  इन क्रियाकलापों के दौरान दिमागी प्रोटीन बनाती है।  यही प्रोटीन बुद्धि तेज़ करने में मदत करता है।  इसलिए यह जरुरी है कि आप पूरी नींद ले ताकि प्रोटीन उत्पादन हो सके।  क्योंकि प्रोटीन का बनना और बिगड़ना रोजाना की प्रक्रिया है।  अगर पुराने प्रोटीन की जगह नए प्रोटीन ना ले तो सारी बुद्धि धीरे-धीरे ख़त्म हो जाएगी।  इसलिए प्रोटीन प्रक्रिया द्वारा बुद्धि धारण करने के लिए नींद का अपना महत्त्व है। 

नींद शरीर को सुव्यवस्थित करती है :-

     दिन के दौरान जो भी सुचना हम प्राप्त करते है, नींद उसको व्यवस्थित करती है।  जो कुछ हम देखते है, सुनते है, सूँघते है, टेस्ट करते है या स्पर्श करते है तो विभिन्न तरह की सुचना मस्तिष्क ( दिमाग़ ) तक पहुँचती है।  नींद इन सूचनाओं को नाड़ी स्टोरेज में आसान योजना को व्यवस्थित करती है।  इसलिए अच्छी नींद के साथ कोई समझौता कभी मत करिए।  हमें अच्छी नींद आवश्यक लेनी चाहिए।  कितनी नींद लेनी है यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह कितना शारीरिक और मानसिक कार्य करता है और किस तरह का का भोजन करता है।  student के लिए 6 से 8 घंटो की नींद होनी चाहिए।  यह भी हमेशा याद रखिए कि पूरी नींद न लेने से मनुष्य की सुचना को दीर्घ कालीन बुद्धि में भेजने की क्षमता का भाग होता है। 

दोपहर की नींद :-

     दोपहर के नींद का मतलब सुबह-सुबह का काम करने के बाद जब दिमाग़ थकान अवस्था में होता है तो 30 से 45 मिनिट की नींद दिमाग को ऊर्जावान बना देती है।  हालांकि यह नींद शारीरिक रूप से सुस्त कर देते है पर दिमाग़ को उर्जावान बना देती है।  अगर आपकी नौकरी इस प्रकार की है जिसमे आपको दोपहर की नींद लेना असंभव है तो परेशान होने की जरुरत नही है, आप कुछ समय शांत भाव में ध्यान मुद्रा में बैठ सकते है।  इससे दिमाग ताज़ा होता है। 

अनिद्रा की स्थिति पर काबू :-

     अगर आपको रात में नींद लेने में दिक्कत है, तो इसके उपाय के लिए कुछ सुझाव इस प्रकार है। 
1)   रात में खाने के बाद, देर रात चाय या कॉफ़ी पीना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।  अगर आपने दिन में ज्यादा कैफ़ीन उपभोग किया है तो वह भी नींद में बाधक हो सकता है।
2)   अधिक प्रोटीन वाले भोजन से बचे-अगर आपको रात में नींद लेने में दिक्कत है तो सोने से पहले ज्यादा प्रोटीन वाले भोजन का उपभोग न करे।
3)   सोने के समय का पालन-  अगर आपके सोने के समय में बदलाव होता रहता है तो यह भी अनिद्रा का कारण होता है।  इसलिए सोने का समय निशचित ( fixed) कर लीजिए। 

अंत अधिक उपादेयक होता है :-

     यह मस्तिष्क का गुण होता है कि यह बीच में प्राप्त सुचना के मुकाबलें पहले या फिर आखिरी में सुचना को बेहतर तरीके से धारण करता है।  जब हम लेक्चर यार सेमिनार सुन रहे होते है तो हम पहले और आखिरी बातों को ज्यादा याद कर पाते है।  इसी तरह फिल्म देखने के दौरान भी ऐसा ही होता है।  सोने जाने से पहले का आखिरी घंटा और सोकर उठने के बाद का पहला घंटा अधिक महत्त्वपूर्ण होता है।  इन दोनों समय को पढाई के लिए इस्तेमाल करिए।  यदि आपको कुछ रिवीजन करना है तो सोने जाने से पहले का समय अधिक महत्त्वपूर्ण है।  सुबह के समय दिमाग़ अधिक चुस्त (फ्रेश) होता है तो सुबह के समय को नया टॉपिक याद करने में लगाइए। 


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23 February 2015

बेहतर तरीके से पढ़ाई


     सोचिए कि आप 6 दिन बाद परीक्षा में बैठने जा रहे है।  आपको 5 विषयों की तैयारी करनी है।  आप निचे दिए कोन-सा तरीक़ा अपनाएंगे ?

तरीका - 1 : -
     एक दिन में एक विषय को अच्छे से पढ़ लीजिए और 6 वे दिन अंतिम ( last ) रूप उन सभी विषयों की rivision ( दोहराना ) करिए। 

तरीका - 2 :-
     सभी विषयों को संयुक्त तरीक़े से पढ़े।  जैसे कि दो घंटा गणित, फिर अगले दो घंटे साइंस आदि। 

दिमाग़ को समझें :-
     जब हम कोई खास विषय पढ़ते है तो दिमाग़ का एक खास भाग अन्य भाग की अपेक्षा अधिक काम करने लगता है।  जब हम साइंस की ओर ध्यान देते है तो दिमाग़ का दूसरा भाग काम करने लग जाता। 

     इस प्रकार, विषय बदलकर पढ़ने से दिमाग़ के विशेष भाग को बारी-बारी से ताजा होने का मौका मिल जाता है और हमें थकान महसूस नही होती। 

निष्कर्ष :-
     अगर हम पुरे दिन एक ही विषय पढ़े तो दिमाग़ के खास भाग पर अधिक दबाव बनता है जो कि किसी भी सूरत में अवांछनीय है।  इसलिए सभी को बदल-बदलकर संयुक्त रूप से पढ़े।  जैसे कि दो-तीन घंटे गणित पढ़ने के बाद, साइंस फिर अगले दो घंटे में अन्य विषय।

सीखने या याद करने में इस तरीक़े का प्रयोग करिए -

काल्पनिक चित्र :-
     जो कुछ आप पढ़ते है।   काल्पनिक चित्र में तबदील करने की कोशिश करिये।  हमारे देखने की मेमोरी सुनने की मेमोरी की अपेक्षा बीस गुना ज्यादा है।  क्योंकि आँखो का कनेक्शन दिमाग़ के साथ जुड़ा है।  वे कानों की कोशिशकाओं के मुकाबलें बीस गुना मजबूत है।  काल्पनिक चित्रण विधि का प्रयोग इतिहास जैसे विषयों में अच्छी तरह से किया जा सकता है।  उदाहरण के लिए आपको हड़प्पा सभ्यता के बारे में जानने की आवश्यकता है तो पढ़िए, समझिए, उस सभ्यता का दिमाग में चित्रण करिये और उसमे रहने की कोशिश करिये।
     इस बात का ध्यान रखे जो कुछ आप पढ़ते है उसके बारे में संबंध बैठाने के लिए आपके पास कुछ न कुछ चित्रण अवश्य होता है।  सुनना हमें सिखने में मदत करता है जबकि देखना और कल्पना करना लम्बे समय तक याद रखने में मदत करता है।
     मानसिक चित्रण ने मुझे पूर्ण स्मृति धारण करने में राष्ट्रीय कीर्तिमान बनाने में सहायता की।  इसलिए किसी भी चीज़ का दिमाग में हमेशा चित्रण करिए।

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22 February 2015

एकग्रता का कैसे विकास करें ?


     जब हम अपनी पसंद की फिल्म देखने जाते हैं।  तब हम तीन घंटे उसी में आँख लगाए बैठे रहते है।  हम शायद ही जानते है कि या फिर जानने की कोशिश करते है कि हमारे पास में कौन बैठा है, कब उठकर चला गया है।  उसी तरह क्रिकेट मैच के दौरान खाना-पीना, सब कुछ छोड़कर ध्यान पूर्वक देखते रहते है और अपने आपको पूरी तरह से उसी में लगा देते है।  लेकिन यदि हम पढ़ाई कर रहे है, तो ध्यान हटने में ज्यादा समय नही  लगता।  अगर घर में संगीत बज रहा हो तो जैसे पढ़ाई से ध्यान हटाने का बहाना मिल गया हो और हमारा ध्यान तुरंत पढ़ाई से हट जाता है। 

एकाग्रता का अर्थ है विषय में रूचि होना :-
      किसी विषय को भली-भांति सीखना या समझना इस बात पर निर्भर करता है कि हम कितने मात्रा में अपना ध्यान उस विषय में concentrate करते है और एकाग्रता इस बात पर निर्भर करती है कि हम उस विषय में कितनी रूचि ले रहे है। 

     इसे समझने के लिए हमें 'रुचि' को अच्छे ढंग से समझना होगा।  कल्पना कीजिए कि आपको पिछले सप्ताह हुई पार्टी के फ़ोटो दिए जाते है जिसमें आप भी शामिल है। 

     आप उन फ़ोटो में क्या देखेंगे ?  
     जाहिर है, उन फ़ोटो में आप अपनी फोटो देखने की कोशिश करेंगे।  ज्यादातर समय हमारी रूचि अपने आपको देखने में रहती है।  इसका मतलब जिस विषय में हम ज्यादा रूचि लेते है, उसमे एकाग्रता का पैमान भी अधिक होता है। हम उस विषय को जल्दी सीख़ लेते है जिस विषय में अपने आपको शामिल कर लेते है। 

एक उदाहरण देखिए :-
     एक स्मृति टेस्ट के दौरान,टीचर ७ वी कक्षा के विद्यार्थियों के दो समूहों (section) को प्राचीन मानव के विकास के बारे में पढ़ाया। 
     1 )  पहले section को कहानी इस प्रकार बताई-प्राचीन मानव गुफ़ा में रहा करता था।  उन्होंने दो पत्थरों को आपस में रगड़कर आग की ख़ोज की और वे पेड़ के पत्तो, जानवरों की खाल पहना करते थे। 
    2 )  teacher ने दूसरे section के विद्यार्थियो से अपने आपको आदि मानव सोचने के लिए कहा गया और उन्हें बताया -
     " आप गुफ़ा में रहा करते थे।  आपने पत्थरों को रगड़कर आग की ख़ोज की।  आप शरीर में पत्तियां और जानवरों की खाल पहनते थे।"

सीख :-
     दूसरे section के विद्यार्थियों ने पाठ जल्दी सीखा।  एक साल बाद वैसे ही ठीक उसी ढंग से कहानी को दोहरा (repeat) कर सके। 
         
       
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21 February 2015

परीक्षा के लिए।


     परीक्षा की तैयारी के लिए teacher उनके अनुभव के आधार पर आने वाले प्रशनों की तैयारी करने केलिए कहते है।  परीक्षा के शुरू होने से पहले आप कितने तेज़ी से तैयारी करते है।  कितने दिन बचें है यह सोंचकर योजना करते है, यह हर एक की अपनी सोच-समझ, क्षमता पर निर्भर करता है।  जब आप परीक्षा से पहले के समय में rivision का काम करते है तो आपके दिमाग में यह doubt आता है कि बचे हुए समय का किस प्रकार से उपयोग किया जाये।  समय फ़टाफ़ट बीत रहा होता है, इसलिए यह जरुरी होता है कि rivision तीव्र गति से जितना ज्यादा संभव हो, हो जाये।  

अपने आपको व्यवस्थित करिए :-
     विभिन्न समय योजना के अनुसार अपनी rivision को व्यवस्थित करिए।  आखिरी सप्ताहों के लिए साप्ताहिक study योजना बनाईए, हर दिन के लिए दैनिक योजना या फिर अगले कुछ घंटो के study session की योजना तैयार करिये।  इस समय योजना के साथ, आप देखेंगे कि किस तरह दैनिक विकास आपकी पूरी स्टडी योजना को प्रभावपूर्ण बनाती है। 

प्रभाव पूर्ण समय :- 
     बहुत से विद्यार्थी जानते है कि कब वे प्रभावपूर्ण तरीक़े से पढाई कर सकते है।  कुछ लोग सुबह के समय अधिक पढाई कर सकते है, तो कुछ लोग शाम या रात में बेहतर तरीक़े से पढाई कर सकते है।  परीक्षा के दिनों में आप हर उपलब्ध समय में पढ़ने की क्षमता रखते है।  इसलिए यह योजना बनाइए कि जब आप अधिक उत्साहात होते है तो कोन सा विषय पढ़ना है।  कम ऊर्जा के समय किस विषय को पढ़ना है।  इस तरह अपनी क्षमता का उपयोग करते हुए योजना बनाइए। 

चिंता छोड़े :-
     अच्छी शुरुवात के बावजूद, कई बार आप देखते है कि चिंता के कारण आप पढ़ नहीं पा रहे।  अगर ऐसा है तो कुछ समय के लिए बाहर इधर-उधर टहलें और गहरी सांस लें फिर वापस स्टडी टेबल पर आ जाए।  

सही दिशा में सोचें :- 
     एक पेपर पर " हा मै कर सकता हू " लिख लीजिए और इस पेपर को अपनी किताबों में या नोट्स के आगे रख लीजिए।  जिसमें इस वाक्य पर आपकी निगाहें बार-बार पड़ती रहे। 

पढ़ाई में विश्राम :-
     पढाई में कुछ देर विश्राम जरूर लें जब आप पढाई में थका हुआ महसूस कर रहे है।  जब आप ज्यादा से ज्यादा याद करने की कोशिश कर रहे हैं तो आपके दिमाग़ को आराम की जरूरत होती है ताकि आपकी क्षमता बनी रहे।  स्टडी टेबल से कुछ देर के लिए उठ जाए थोड़ा इधर-उधर घूम लें, अपना ध्यान कही और लगा ले, फिर वापस आकर पढ़ने बैठ जाए। 

एकाग्र पूर्ण पढ़ाई :- 
     रिवीजन के दौरान ख़ास point पर ध्यान दे।  समय सीमित होने के कारण आपको यह चुनना पड़ेगा कि कम समय में किस तरह ज्यादा से ज्यादा पढ़ा जा सके।  विस्तार से पढ़ने या फिर याद करने केलिए समय नहीं होता है।  अंतिम समय में सिर्फ़ खास point को ही याद करने की आशा की जा सकती है। 

उत्तेजक पदार्थो से बचे :-
     कॉफ़ी, चाय जैसे पदार्थो से बचना चाहिए जब आपका नर्वस सिस्टम पहले से अधिकतम क्षमता से काम कर रहा है तो फिर आपको और उत्तेजित करने के लिए चाय कॉफ़ी लेने की जरूरत नही होती।  ज्यादा कैफीन आपके शरीर पर विपरीत प्रभाव डाल सकता है।

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19 February 2015

आतंरिक बल से सफ़लता और टुकड़ो में याद रखें।

1) आतंरिक बल से सफ़लता :-
     महान runner इस बात को मानते है कि खेलों में 60-90% सफ़लता में मानसिक सोच का विशेष महत्त्व है।  यह बात सिर्फ खेलों के विषय में ही सही नहीं है बल्कि हर क्षेत्र में लागू होती है।  आतंरिक शक्ति या स्वयं का सुझाव हमें अपने लक्ष्य तक जल्दी पंहुचा सकता है।

परीक्षा में आतंरिक शक्ति का कैसे प्रयोग करें ?
     परीक्षा शुरू होने से एक रात पहले, याद करने के लिए आतंरिक बल का ५ मिनिट के लिए प्रयोग करिए। 
1.  अपनी आंखे बंद करके सोचें कि आप परीक्षा केंद्र की तरफ जा रहे है फिर अपनी सीट ढुंग कर बैठ जाते है। 
2.  यह महसूस करिये कि परीक्षक आपके तरफ आता है, आपको प्रशन - पत्रिका और उत्तर - पत्रिका देते है। 
3.  अब आप मन ही मन में परीक्षा नियम और प्रशन पढ़ रहे है। 
4.  अब आप अपने आपको सुझाव दें, सोचें कि आप  हर एक प्रशन का उत्तर सही दे रहे है और समय पर सभी प्रशन समाप्त कर लेते है। 
     परीक्षा से पूर्व इस तरह का अभ्यास आप में आत्मविकास बढ़ाएगा और साथ ही में आपकी कार्य क्षमता में सुधार लाएगा।  

 2) टुकड़ो में याद रखें :-
     असफ़लता नई शुरूवात को जन्म देती है।  किसी ने सही कहा है कि सफ़लता पाने के लिए असफ़लता की काफ़ी जरूरत होती है।  असफ़ल होने पर इंसान नयी कोशिश करता है, नए विचारों को जन्म देता है, नए लोगों के संबंध में आते है, नए दोस्त बनाता है।  जबकि सफ़ल होने पर दिमाग़ संकीर्ण (मजबूत ) हो जाता है।   

पढ़ाई में इस विचार को कैसे लागू करें ?
     यह नियम या विचारधारा लम्बी साहित्य में बेहतर रूप में लागु होती है।  बड़े topic को याद करने का सबसे अच्छा तरीका है कि उस विषय को विभिन्न भागों में बांटकर याद किया जाए।  इस तरह छोटे हिस्सों में बाटे हुए पाठ ( topic ) को याद करना अधिक आसान हो जाता है।  इस तरह अधूरा कार्य को फायदेमंद बनाया जा सकता है। 
                                                !!! ALL THE BEST !!!


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