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1 April 2015

टी. वी. के संदर्भ में सावधान रहें


     T.V. के कारण आज जितना समय बर्बाद हो रहा है, उतना इतिहास में कभी किसी दूसरी वजह से नहीं हुआ - वैसे facebook भी बहुत तेज़ी से इस श्रेणी में आता जा रहा है।  T.V. के कई दुष्प्रभाव होते है, लेकिन हम यहाँ पर केवल समय की बर्बादी के बारे में बात करेंगे।  एक survey में यह पाया गया कि लोग हर सप्ताह लगभग 17 घंटे tv देखते है यानी लगभग ढ़ाई घंटे प्रति दिन।  इसका मतलब है कि लोग हर दिन अपने पास उपलब्ध सक्रिय समय का 20% हिस्सा टी.वी देखने में गवा रहे है। 

     जरा गौर से सोचें, अगर आपने टी.वी नहीं देखा, तो क्या आफ़त आ जायेगी ?  अक्सर होता यह है कि हम यह सोचकर टी.वी देखने बैठते है कि बस आधा घंटा देखेंगे।  आधा घंटे बाद दूसरे चैनल पर कोई अच्छा कार्यक्रम दिख जाता है और इस तरह कब दो घंटे हो जाते है, पता ही नहीं चलता।  इस चक्कर में आपके बहुत से जरूरी काम अधूरे रह जाते है।  टी.वी के बहुत से समर्थक इसके शैक्षिक महत्त्व का दावा करते है, लेकिन मुझे आज तक ऐसा कोई व्यक्ति नहीं मिला, जो सिर्फ़ शैक्षिक महत्त्व के लिए टी.वी देखता हो।  अगर शिक्षा ही ग्रहण करनी है, तो टी.वी से बेहतर विकल्प मौजूद है - पुस्तकें पढ़े या इंटरनेट से जानकारी लें।  वैसे यदि आप टी.वी पर केवल ज्ञानवर्धक कार्यक्रम ही देखते है, तो यह अध्याय आपके लिए नहीं है।  मेरे एक परिचित है, जिनके यहाँ टी.वी सुबह से रात तक चलता रहता है।  सुबह वे खुद न्यूज़ देखते है, बीच-बीच में बच्चें स्कूल जाने से पहले कार्टून देख लेते है, दोपहर में पत्नी के सीरियल्स और गाने चलते है, शाम को वे ख़ुद घर लौटकर न्यूज़ और सीरियल्स देखते है, बीच-बीच में बच्चें कार्टून देखते है।  यानि  टी.वी के प्रति ही समर्पित होता है।  टी.वी उनके परिवार का एक स्थायी और सबसे महत्त्वपूर्ण सदस्य बन चूका है।  और तो और, वे खाना भी टी.वी देखते हुए ही खाते है, जिससे न तो उन्हें खाने का स्वाद आता है, न ही उन्हें यह अंदाज़ा रहता है कि  वे कितना खा गए।  नतीजा यह होता है कि  वे ज़रूरत से ज्यादा खाते है और दिनोदिन मोटे होते जाते है। 

     बच्चे कितनी देर तक टी.वी देखते है, इसका हिसाब लगाना मुश्किल होता है।  इसका एक उदाहरण देखें - चौथे ग्रेड की क्लास में एक सर्वे किया गया कि विद्यार्थी कितने घंटे टीवी देखते है।  तब उस क्लास में अमेरिकी संगीतकार रॉब जॉम्बी भी पढ़ते थे।  रॉब के शिक्षकों के होश उड़ गए, जब उन्हें पता चला कि रॉब एक दिन में नौ घंटे टीवी देखता है।  उन्होंने रॉब से पूछा कि रात को देर तक जगे बिना यह इतने समय टीवी कैसे देख लेता है।  उसका जवाब था, 'मै सुबह जल्दी उठ जाता हुँ और कई बार तो मुझे कृषि संबंधी कार्यक्रम देखने पड़ते है, क्योंकि इतनी सुबह वाही कार्यक्रम आते है।'  इस प्रसंग को कई साल हो चुके है।  अब तो चौबीसों घंटे मनपसंद कार्यक्रम चलते रहते है और अपने मन पर काबू रखने के लिए काफी अनुशासन की जरूरत होती है। 

     यदि आप अपने समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग करना चाहते है, तो टीवी के संदर्भ में सावधान रहें। 

     अख़बार टीवी की तुलना में जानकारी का बेहतर साधन है।  अख़बार हमें पुरे संसार की जानकारी देता है और हमारा ज्ञान बढ़ता है, लेकिन इसके दूसरे पहलू पर भी नज़र डालकर देख लें।  अगर सचिन तेंदुलकर ने अपने क्रिकेट करियर का 100 वा शतक बना दिया, तो उसके विस्तृत विवरण पढ़ने से क्या लाभ है, जब तक कि आपकी क्रिक्रेट में रूचि न हो ?  कैटरिना कैफ़ या सलमान खान के प्रेम प्रसंगों के बारे में पढ़ने से आपको क्षणिक आनंद के शिव क्या मिल रहा है ?  अख़बार में पढ़ने के लिए चटपटी या मसालेदार खबरों के बजाय केवल सकारात्मक और ज्ञानवर्द्धक ख़बरें ही चुनें, क्योंकि इस तरह आपका बहुत सा समय बच सकता है। 

     महत्त्वपूर्ण सिद्धांत यह हैं कि अपने काम से काम रखें और दीगर बातों को नज़र अंदाज कर दे।  और यह बात टीवी और अख़बार के संदर्भ में ही नहीं, हर चीज़ पर लागू होती है।  ब्रिटिश गायक क्रैग डेविड जैसे बनें, जो हर दिन अपनी दाढ़ी सँवारने में 40 मिनट बर्बाद कर देते थे।  अगर आप इस सिद्धांत पर अमल करते है, तो आप कम से कम आधे घंटे का समय बचा लेंगे, जिसमें आप अपने महत्त्वपूर्ण काम निबटा सकते है। 

इस तरह सीखें, जैसे आप हमेशा जिन्दा रहेंगे, इस तरह से जिए जैसे आप कल ही मरने वाले हो। 
                                                                 - अज्ञात     

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31 March 2015

एक घंटा व्यायाम करें


     इंसान सोचता तो यह है कि वह अपने लिए जी रहा है, लेकिन वह जिस तरह समय ख़र्च करता है, उससे यह लगता ही नहीं है कि वह अपने लिए जी रहा है। अक्सर वह ऐसी नौकरी करता है, जिसमें उसे मज़ा नहीं आता है।  अक्सर वह ऐसा खाना खाता है, जो उसकी पत्नी या बच्चों की पसंद के हिसाब से बनता है।  जब वह थका-माँदा घर लौटता है, तो उसे टी.वी. पर भी दूसरों की पसंद के कार्यक्रम देखने पड़ते है।  यानी वह अपने लिए तो समय निकल ही नहीं पाता। 

     आपको हर दिन एक घंटा खुद के लिए निकालना चाहिए।  तेईस घंटे दूसरों के लिए, एक घंटा अपने लिए।  और इस एक घंटे में आपको अपने शरीर की देखभाल करनी चाहिए।  अपने स्वास्थ और सौंदर्य की देखभाल करने के लिए एक घंटे का समय ज्यादा नहीं है।  आख़िर शरीर की बदौलत ही तो आप अपने सारे काम कर रहे है।  अगर यही स्वस्थ न रहे, तो आप इस सुन्दर संसार का आनंद कैसे ले पाएँगे ?  यही तो वह मुर्गी है, जो रोज़ आपको सोने के अंडे देती है और आप है कि इसी का पेट चीरने पर आमादा है।  आप सुबह से शाम तक स्वादिष्ट चीज़े कहते रहते है, जिनकी शरीर को जरूरत नहीं होती और जिस व्यायाम की इसे ज़रूरत होती है, उसे आप कभी नहीं करते है।  अब आप ही बताए कि यह शरीर के साथ अन्याय नहीं, तो और क्या है ?

     ध्यान रखें, यदि आपने अपने शरीर का ध्यान रखने के लिए समय नहीं निकाला, तो आपका बाक़ी समय (और जीवन ) भी ख़तरे  में पड़ जाएगा।  इसीलिए इस सिद्धांत को इस वेबसाइट में शामिल किया गया है।  आप सोच रहे होंगे की समय बचाने वाले टाइम मैनेजमेंट वेबसाइट में समय ख़र्च करने की सलाह क्यों दी जा रही है।  इसलिए, क्योंकि इस एक घंटे का असर आपके बाकि तेईस घंटों पर पड़ेगा।  व्यायाम तो एक निवेश है, जिसका आपको समय-प्रबंधन के संदर्भ में कई गुना फ़ल मिलेगा। 

     एक घंटे में आपको अपने शरीर की देखभाल करनी है।  टहलना है, व्यायाम करना है, योगा क्लास या जिम जाना है, अपने शरीर की मालिश करनी है, यानि कुल मिलाकर शरीर के स्वास्थ पर ध्यान देना है।  समय-प्रबंधन के क्षेत्र में व्यायाम के कई लाभ है - एक तो इससे आपका स्वास्थ अच्छा रहता है, जिससे बिमारी के कारण आपका क़ीमती समय नष्ट नहीं होता।  दूसरे, इससे आपके शरीर के साथ-साथ दिमाग़ में भी स्फूर्ति और चुस्ती आ जाती है।  तीसरे, आपका आलस दूर हो जाता है और आप अपने महत्त्वपूर्ण कार्य पुरे जोश से करने में जुट जाते है।  व्यायाम से आपका शरीर गठीला रहेगा और आपका हुलिया अच्छा दिखेगा।  यदि आप सेल्समैन है, तो अच्छा हुलिया बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि आकर्षक और शारीरिक दॄष्टि से फ़िट सेल्समैन से लोग ज्यादा प्रभावित होते है। 

     बस एक बात का ध्यान रखें।  व्यायाम सही तरह से करें।  अक्सर लोग कहते है, 'मै आज आधा घंटा पैदल चला।'  महत्त्वपूर्ण तो यह है कि  उस आधा घंटे में आप कितने किलोमीटर पैदल चले और कितनी तेज़ी से चले।  यदि आप पैदल चलकर व्यायाम कर रहे है, तो इसके लिए आपको दुरी और समय का सही मिश्रण करना होगा।  आदर्श घूमना होता है पचास मिनिट में पाँच किलोमीटर।  वैसे बेहतर यही रहेगा कि  आप अपनेव्ययम् केवल पैदल चलने तक ही सीमित न रखें।  जॉगिंग करे, योग करें, वेटलिफ्टिंग करें, ताकि व्यायामों की विविधता रहे।  तीस मिनिट में तीन किलोमीटर पैदल चले और तीस मिनिट में बाकी व्यायाम करें।  पैदल चलने के लिए सही समय सूर्योदय के पहले रहता है, क्योंकि उस समय वातावरण में प्रदुषण नहीं होता है और ताज़ा ऑक्सीजन आपके फेफड़ों और दिमाग़ में पहुँचकर आपको ताज़गी से भर देती है। 

छत की मरम्मत का समय तब होता है, जब सूरज चमक रहा हो। 
                                            - जॉन ए.फ. केनेडी  

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30 March 2015

तय करें कि कौन सा काम कब करना है


      हमें बहुत सी भूमिकाओं में काम करना होता है।  पुरुषों को बेटे, पिता, पति, कर्मचारी, सेल्समेन आदि की भूमिकाएं निभानी होती है और ज़ाहिर है, उनके साथ जिम्मेदारियाँ भी जुडी होती है।  पत्नी घर का सामान लाने के लिए आपको बाज़ार भेजना चाहती है, दोस्तों के मोबाइल फोन समय-असमय चले आते है, बिन बुलाए रिश्तेदार आ जाते है, अनचाहे सामाजिक समारोहों और दीगर कार्यक्रमों में जाना होता है।  देखिए, एक बात अच्छी तरह समझ ले।  जीवन कोई फूलों की सेज नहीं है, यह तो कंप्यूटर गेम मारिओ की तरह मुश्किल डगर है।  आपको बतख, खाइयों, काँटों और जीव-जंतुओं की बाधाओं से बचते-बचाते हुए अपनी मंज़िल तक पहुँचना है।  बाधाओं से भटकना नही है, बस मंज़िल को ध्यान में रखकर लगातार चलते रहना है।  यही मंजिल तक पहुँचने का उपाय है। 

     जिस तरह एक हाथ की उंगलियाँ एक नाप के नहीं होते, उसी तरह सभी काम भी एक समान नहीं होते। कुछ काम महत्त्वपूर्ण होते है, जिनमें ज्यादा समय और एकाग्रता की जरूरत होती है।  कुछ काम छोटे होते है, जिन्हें आसानी से कभी भी पूरा किया जा सकता है।  और कुछ काम ऐसे होते है, जिन्हें आप नहीं, कोई भी कर सकता है।  यही टाइम मैनेजमेंट काम आता है।  आप महत्त्वहीन काम दूसरों से करवा सकते है और समय ख़रीद सकते है। 

     हमारी एक रिश्तेदार है, जिसे अपने घर में सब्जियाँ या किराने का सामान रखना पसंद नहीं है।  परिणाम यह होता है कि उसके पति को अक्सर बाज़ार जाना पड़ता है।  पति कहता है, 'आज तो भजिए खाने का मन हो रहा है।'  पत्नी जवाब देती है, 'तो बाज़ार से जाकर बेसन ले आओ।'  पति कहता है, 'आज हलुआ बना दो।'  पत्नी कहती है, 'जाकर रवा ले आओ।'  इस तरह वह महिला अपने पति को लगभग हर दिन कोई न कोई सामान लाने बाज़ार भेज़ देती है।  पति भी इतना भला मानुस है कि बिना उफ़ किए रोज़ चला जाता है।  अगर पति-पत्नी समय के संदर्भ में सजग होते, तो वे योजना बनाकर एक ही दिन में हफ़्ते भर का सामान माँगा लेते, जिससे सात दिन का समय ख़राब नहीं होता।  इस तरह के अनेक उदाहरण देखने को मिलते है।  इंटरनेट पर इ-मेल चेक करने गए और सर्फिंग करने में एक-दो घंटे बर्बाद कर दिए।  दरअसर, आपको यह संकल्प कर लेना चाहिए कि  आप महत्त्वहीन काम करने में अपना समय बर्बाद नहीं करेंगे और केवल महत्त्वहीन कामों में ही पूरा समय देंगे। 

     वैसे आप सप्ताह में एक दिन छुटपुट घरेलू कामों के लिए अलग रख सकते है।  उस दिन योजना बनाकर अपने सभी pending काम निबटा ले।  अगर कोई काम ऑफिस के रास्ते में हो सकता है, तो उसके लिए अलग से समय बर्बाद न करे, बल्कि ऑफिस आते-जाते समय निबटा लें।  ट्रैन का reservation करवाना है, तो लंबी लाइन में लगने के बजाय इंटरनेट पर घर बैठे-बैठे ही reservation करवा लीजिए।  इसमें आपको थोड़ा अतिरिक़्त पैसा तो देना पड़ेगा, लेकिन आपका समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग के सिद्धान्त का पालन कर रहे है और पैसा देकर समय खरीद रहे है। 

     यदि किसी से मोबाइल पर बात करनी है, तो उसके लिए शाम का समय चुनें।  सुबह का क़ीमती समय फालतू कामों में बर्बाद न करें।  यही इंटरनेट और ईमेल के बारे में सही है।  इन कामों में बहुत एकाग्रता की जरूरत नहीं होती और इनमें समय भी बर्बाद होता है, इसलिए इन्हे अपने खाली समय में करें, जब आप बहुत थके हो और अपने दिमाग़ को एकाग्र न कर सकते हो।  सुबह-सुबह टी.वी. से भी दूर रहें।  सुबह तो अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम करें, क्योंकि सुबह के कामों से ही आपके पूरे दिन की दिशा तय होती है।  अगर आप विज्ञार्थी है, तो सुबह सबसे मुश्किल विषय पढ़े, अगर आप सेल्समेन है, तो सुबह सेल्स कॉल करें। 

     देखिए, चाहे आपमें कितना भी अनुशासन हो और आप योजना पर कितनी ही निष्ठा से चलते हो, कई मौक़े ऐसे आते है, जब आपका काम करने का मुद नहीं होता।  यही वह समय है, जिसमें आपको अपने छुटपुट घरेलू और बाहरी काम निबटालेना चाहिए।  यह टी.वी. के सामने लेटने से तो बेहतर है।  इस संदर्भ में एन बी सी (NBC) के प्रमुख और अमेरिकी प्रोडूयसर जुकर का उदाहरण याद रखें, जिन्हें आंतो का कैंसर था।  वे अपने काम के प्रति इतने समर्पित थे कि एक दिन भी ऑफिस से छुट्टी नही लेते थे।  वे अपनी कीमोथैरेपी शुक्रवार शाम को करवाते थे, ताकि दो दिन की छुट्टियों में आराम करने के बाद वे सोमवार सुबह ऑफिस आ सकें।  काम करने के लिए आप कौन सा समय चुनते है, उसी से सारा फ़र्क पड़ता है। 

हर काम करने के लिए समय कभी पर्याप्त नहीं होता है, लेकिन सबसे महत्त्वपूर्ण काम को करने के लिए समय हमेशा पर्याप्त होता है। 
                                      - ब्रायन ट्रेसी  

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26 March 2015

न्यूटन के गति के पहले नियम का लाभ लें


     सरल भाषा में न्यूटन का गति का पहला नियम कहता है - जो चीज़ जिस अवस्था में है, उसी में बनी रहती है, जब तक कि उस पर बाहरी बल का प्रयोग न किया जाए।  वह बहुत ही अदभुत नियम है।  यह वस्तुओ पर ही नहीं, व्यक्तियों पर भी लागू होता है।  आप जिस अवस्था में है, उसी में रहेंगे, जब तक कि बाहरी बल का प्रयोग न हो।  यह बाहरी बल कहा से आता है - या तो दूसरों के दबाव से या फिर आपके अनुशासन से, आपकी स्व-प्रेरणा से। 

     यही पर समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग का सिद्धांत काम आता है - आर्थिक लक्ष्य बनाए।  यही आर्थिक लक्ष्य आपको निरंतर प्रेरित करता है, ताकि आप बाहरी बल यानि अनुशासन का प्रयोग करके अपनी अवस्था को बदल लें।  आपकी आर्थिक स्थिति चाहे जैसी हो, आप अनुशासन का प्रयोग करके उसे हमेशा बेहतर बना सकते है।  जिम रॉन की बात हमेशा याद रखे, 'अनुशासन ही लक्ष्य और सफलता के बीच का पुल है।'

     देखिए, सच तो यह है कि अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने का काम आपको खुद ही करना होगा।  दूसरों को क्या पड़ी है, जो वे आपके जीवन को बेहतर बनाने के लिए आप पर दबाव डालें ?  आदमी घड़ी में चाबी भरता है, तो घड़ी की नहीं, अपनी आवश्यकता के लिए भरता है।  दूसरे लोग तो आपके भलाई के लिए नहीं, बल्कि उनकी खुद की भलाई के लिए आप पर दबाव डालेंगे।  वे आपसे अपना काम निकलवाने के लिए आप पर दबाव डालेंगे।  इसलिए यह बात अच्छी तरह समझ ले कि अनुशासन में रहने और म्हणत करने की जिम्मेदारी आपकी है। 

     इस नियम का एक अच्छा पहलू भी है।  जब आप सफलता की डगर पर चलने लगेंगे, तो आप सफलता की अवस्था में तब तक रहेंगे, जब तक कि बाहरी बल का प्रयोग न हो।  जैसा हम पिछले सिद्धांत में देख चुके  ,बहुत से बल आपकी प्रगति में बाधा डालने की कोशिश करेंगे, लेकिन आप उनसे सतर्क रहेंगे और अपनी गति को बरक़रार रखेंगे। 

     एक बार ड्यूक ऑफ वेलिंग्टन ने युवा ब्रिटिश नेता  पामस्टर्न को सुबह साढ़े सात बजे का अपॉइंटमेंट दिया।  एक मित्र ने पामस्टर्न से पूछा कि वे तो रात को देर तक जागते है, फिर वे इतनी सुबह अपॉइंटमेंट के लिए कैसे पहुचेंगे।  पामस्टर्न का जवाब था - 'बहुत आसान है।  यह सोने से पहले मेरा आखिरी काम होगा।'  यही है अनुशासन !  पामस्टर्न जानते थे कि  वह मुलाकात महत्त्वपूर्ण थी, इसलिए उन्होंने देर तक जागने की अपनी आदत को आड़े नही आने दिया।  उन्होंने अपनी दिनचर्या में थोड़ा फेरबदल करके न्यूटन के गति के पहले नियम का इस्तेमाल किया।  आप भी ऐसा ही कर सकते है।   अनुशासन का इस्तेमाल करके प्रगति की राह पर चल पड़े और सामने आने वाली हर बाधा को दूर करते जाए।

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25 March 2015

निष्चित समय पर काम करें


     हमारे शरीर में एक घड़ी होती है, जिसे बायोलॉजिकल क्लॉक ( biological clock ) कहा जाता है।  जब आप निष्चित समय पर काम करने की आदत डाल लेते है, तो आपका शरीर उसी अनुसार ढल जाता है।  यदि आप हर दिन दोपहर डेढ़ बजे खाना खाते है, तो आपको उस समय अपने आप भूक लगने लगेगी।  यदि आप हर दिन रात को दस बजे सोते है, तो आपको उस समय अपने आप नींद आने लगेगी।  यह बायोलॉजिकल क्लॉक है, जो आपसे निष्चित समय पर निष्चित काम करवा रही है, जो आपसे निष्चित समय पर निश्चित काम करवा रही है, बस आपको आदत डालकर इसमें चाबी भरणी पड़ती है। 

      प्रसिद्ध दार्शनिक इमैनुअल कांट के बड़े पाबंद थे।  वे हर शाम को साढ़े तीन बजे घूमने जाते थे और इसमें एक मिनिट भी इधर से उधर नहीं होता था।  उनकी समय की पाबंदी से उनके पड़ोसियों को यह लाभ होता था कि वे इससे अपनी घडी मिला सकते थे। 

     यदि आप निष्चित समय पर निष्चित काम करने की आदत डाल लेते है, तो उस समय आपका शरीर और मन दोनों ही उस काम को करने के लिए पूरी तरह तैयार होते है।  अगर आप सुबह ठीक छह बजे घूमने जाते है, तो शरीर इसके लिए पूरी तरह से तैयार होता है और आपको इसमें आलस कम आता है।  दूसरी ओर, अगर घूमने का कोई निष्चित समय नहीं है, तो आप आसानी से आलस के शिकार हो जाते है। 

     ख़ास तौर पर अप्रिय कामों के लिए यह आदत बड़ी कारगार होती है।  अगर आपको पढ़ाई करना है, तो उसका निष्चित समय तय कर लीजिए।  अगर आपको सेल्स में कोल्ड कॉल करना है, तो उसके लिए निष्चित समय तय कर लीजिए।  अगर आपको व्यायाम करना है, तो उसके लिए निष्चित समय तय कर लीजिए।  हर महत्त्वपूर्ण काम का निष्चित समय तय करने से आपका शारीरिक और मानसिक रूप से उस काम के लिए पूरी तरह तैयार रहते है। 

     निश्चित समय पर महत्त्वपूर्ण काम करने की आदत डालने के कई फ़ायदे है।  पहला तो यह कि आपको वह काम करने में आलस नही आता है और आप आदतन बिना सोचे-समझे उसे करने में जुट जाते है।  दूसरे, आदत पड़ने पर आपका शरीर और मन पूरी तरह सक्रिय होकर सहयोग देता है।  तीसरे, आपको उसमे आनंद आने लगता है, जिससे काम सरल हो जाता है।  चौथे, समय के साथ-साथ आप उस काम को जल्दी या ज्यादा अच्छी तरह करने के तरीक़े ख़ोज लेते है।  पाँचवे, जब आप नियमितता से एक निष्चित तंत्र में चलते है, तो प्राकृतिक शक्तियाँ भी आपकी मदत करने लगती है।  पूरा ब्रम्हांड एक निष्चित तंत्र में काम करता है, आपको भी ऐसा ही करना चाहिए। 

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7 March 2015

अपने प्राइम टाइम में काम करें



     टेलिविजन पर प्राइम टाइम में - यानि रात आठ बजे से दस बजे तक - विज्ञापन की किंमत सबसे ज्यादा होती है।  विज्ञापन उतने समय का रहता है परन्तु इसकी किंमत बढ़ जाती है।  किंमत बढ़ने का कारण सिर्फ़ यह होता है कि वह विज्ञापन प्राइम टाइम में प्रसारित किया जाता है, जिसमे इसे ज्यादा दर्शकों द्वारा देखा जाता है।

     टेलीविज़न के प्राइम टाइम की अवधारणा से हम यह सीख सकते है कि हमारे-आपके लिए भी दिन के चौबिसौ घंटे एक से नही होते।  दिन के किसी खास समय आपकी ऊर्जा, विचार-शक्ति, उत्साह और कार्यक्षमता बाकि समय की तुलना में अधिक होती है।  यही आपका प्राइम टाइम है।  ज्यादातर लोगों के लिए सुबह का समय प्राइम टाइम होता है, जब वे बड़े-बड़े काम चुटकियों में कर सकते है।  परन्तु ध्यान रहे, हर व्यक्ति का प्राइम टाइम अलग-अलग़ होता है।  कई लोगों के लिए रात का समय प्राइम टाइम हो सकता है और कइयों के लिए दोपहर का।  आपका प्राइम टाइम चाहे सुबह का हो या रात का, महत्त्वपूर्ण बात इसे पहचानना है।

     आपका प्राइम टाइम कोन सा है, यह पहचानना इसलिए जरुरी है, ताकि आप अपने समय का सर्वश्रेष्ठ उपयोग कर सकें।  अपने सबसे महत्त्वपूर्ण या रचनात्मक काम इसी दौरान करे, ताकि वे अच्छी तरह से और जल्दी हो सके।  अपने प्राइम टाइम में छुटपुट काम करके उसे बर्बाद न करे, क्योंकि छुटपुट काम तो आप बाकि के समय में भी कर सकते है।

     यदि आप सुबह के समय ज्यादा फुर्तीले, ऊर्जावान और चुस्त होते है, यानि सुबह का वक़्त आपका प्राइम टाइम है, तो आप एक तरह से सौभाग्यशाली है।  अगर आप दोपहर में एक झपकी ले लीजिए, तो आप एक दिन में दो सुबहें प्राप्त कर सकते है।  दोपहर की झपकी के बाद आप लगभग उतने ही फुर्तीले, ऊर्जावान और चुस्त हो सकते है, जितने की सुबह थे।

     अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर दिया जाता है कि समय की मात्र और गुणवत्ता में कोई सीधा संबंध नही होता।  कई बार तो एक घंटे में ही इतना कुछ हो जाता है, जो आम तौर पर एक दिन में नही हो पता।  याद रखे, समय की मात्र के बजाय उसकी सघनता और गुणवत्ता ज्यादा महत्त्वपूर्ण है।  काम के लंबे घंटे महत्त्वपूर्ण नही है, महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वे ठोस और सघन हो।  इसी को अंग्रेजी में क्वालिटी टाइम कहा जाता है।

     ध्यान रखिए, वह व्यक्ति ज्यादा सफल नही होता, जो दिन में आठ घंटे काम करने का लक्ष्य बनता है - ज्यादा सफल तो वह व्यक्ति होता है, जो दिन में आठ या नौ काम करने का लक्ष बनता है।  दोनों में फर्क इतना है कि पाहला व्यक्ति समय की मात्र को महत्त्व देता है और दूसरा समय की गुणवत्ता को और इसी से उनकी सफलता में जबरदस्त फर्क पड़ता है।


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5 March 2015

टालमटोल न करें



     हम सभी कभी न कभी टालमटोल करते है।  आज के काम को कल पर टाल देते है।  कारण यह होता है है कि कभी हमारा मूड नही होता, तो कभी काम मुश्किल लगता है।  लेकिन यह याद रखे कि टालमटोल समय प्रबंधन की दॄष्टि से खतरनाक है।  इसका एक नुकसान तो यह है कि आप कल के समय को गिरवी रख देते है।  जिस काम को आप आज ही निबटा सकते है, उसे कल पर टाल देने से आप कल के बोझ को और ज्यादा बढ़ा देते है।  आज का काम आज ही पूरा करे, ताकि आने वाले कल पर बोझ न पड़े।  संभव हो, तो आने वाले कल के काम कुछ काम भी आज ही निबटा लें, ताकि कल के दिन आप पर दबाव कम हो जाए और आप उसमे नए काम कर लीजिए। 

     अब आप यह समझ लीजिए कि हम टालमटोल क्यों करते है।  इसके बहुत से कारण होते है - या तो काम boaring या मुश्किल होता है, या उसकी कोई समय सीमा नही होती, या उसका लक्ष्य स्पष्ट नही होता, या आपको वह काम इतना बड़ा नज़र आता है कि आपको समझ ही नही आता कि कहाँ से शुरू करे।  इसके अलावा, कई बार तो हम इसलिए टालमटोल करते है, क्योंकि हमारे पास पूरी जानकारी नहीं होती और हम सोंचते है कि पूरी जानकारी के बगैर काम नही हो सकता।  सौ बात की एक बात, टालमटोल का कारण चाहे जो हो, उसे दूर करे और आज के काम को आज ही पूरा करने की आदत डालें।  यह भी न भूलें कि बुलंद इरादों से हर समस्या विकराल लग सकती है।  मुख्य सवाल तो यह है कि आपका इरादा कितना बुलंद है। 
 
     टालमटोल का सबसे आम कारण यही होता है कि किसी काम को करने का हमारा मुड नही होता।  देखिए, यह बात अच्छी तरह समझ लीजिए कि अच्छा काम करने का मूड कभी नहीं होगा।  मन चंचल है और अगर सदियों से इसे वश में रखने को कहा गया है, तो उसके पीछे कोई अच्छा कारण होगा।  मन कभी भी अच्छी चीजों की ओर नहीं जाता है, क्योंकि उनके लिए अनुशासन और श्रम की जरुरत होती है।  यह तो हमेशा क्षणिक सुख और आनंद के पीछे भागता है।  सुन्दर लड़कियों के साथ बातें करने का तो आपका मुड़ हमेशा रहता है, लेकिन आस्तीन चढ़ाकर और कमर कसकर मेहनत करने का आपका मन कभी नही होता।  मन मेहनत से घबरता है, इसलिए अगर आप जीवन में कुछ करना चाहते है, तो मन या मूड के गुलाम मत रहिए।  मन को अनुशासित करिए और मूड हो या ना हो, काम शुरू कर दीजिए। 
 
     टालमटोल करने का एक रूप काम को अधूरा छोड़ना भी है।  आप किसी काम को अधूरा छोड़ देते है और यह सोचते है कि उसे कल पूरा कर लेंगे।  जब कल आता है, तो आपको यह याद करना पड़ता है कि आपने उस काम को किस मोड़ पर छोड़ा था, आपका लक्ष्य क्या था और आप उसे कैसे पूरा करने वाले थे।  इस चक्कर में आपका बहुत सा समय बर्बाद हो जाता है।  इसके अलावा, हो सकता है की अगले दिन आपको उस काम को पूरा करने की फुरसत ही ना मिले।  इसलिए हमेशा काम पूरा करके ही उठिए।  अगर काम बड़ा हो, तो उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में बाट लीजिए और सिर्फ एक हिस्से को ही पूरा करने की योजना बनाइए।  टालमटोल करना एक लोकप्रिय बहाना है और जैसे कि एक कहावत है, "कल सप्ताह का सबसे व्यस्त दिन होता है।"

कुछ लोगों के पास हज़ारो कारण होते है कि वे अपना मनचाहा काम क्यों नही कर सकते, जबकि उन्हें तो बस एक कारण की जरुरत होती है कि वे उसे क्यों कर सकते है। 
                                        - विलिस आर. व्हिटनी

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2 March 2015

काम सौंपना सीखें


     कोई भी इंसान सब कुछ नही कर सकता।  बरहाल, कोई लोग हर काम खुद करने की कोशिश करते है।  और जाहिर है, वे असफ़ल होते है। 

     हर व्यक्ति यह चाहता है कि अपने महत्त्वपूर्ण काम वह खुद करे, लेकिन एक निशचित ऊँचाई पर पहुचने के बाद प्रगति करने के लिए दुसरो को काम सौंपना अनिवार्य हो जाता है।  बिज़नेस की शुरुवात में तो व्यक्ति सारे काम खुद कर सकता है, परन्तु बिज़नेस बढ़ने के बाद काम इतने बढ़ जाते है कि सहयोगियों के बिना तरक्की नही हो सकती।  ऐसे में अगर वह सही सहयोगी खोजकर उन्हें काम सौंपना ( delegation ) सीख लीजिए, तो वह आगे भी प्रगती कर सकता है।  अगर वह यह नही सीख पाता, तो भविष्य में उसकी प्रगति की संभावना कम हो जाती है। 

     दूसरों को महत्त्वपूर्ण काम सौंपना आसान नहीं होता।  दूसरों की योग्यता, बुद्धि, क्षमता और निष्ठा पर भरोसा करना आसान नही होता।  लेकिन बड़ी सफ़लता हासिल करने के लिए ऐसा करना जरुरी होता है।  इसके बाद ही सच्ची प्रगति संभव है, क्योंकि अब आप अकेले नही है।  अब आपके पास एक टीम है, जिसकी वजह से आपका समय कई गुना बढ़ जाता है और आप उसका सदुपयोग करके ज्यादा तेज़ी से अपनी मंज़िल पर पहुंच सकते है। 

     ज्यादा तर लोगों के साथ एक बड़ी समस्या यह है कि वे हर काम खुद करने की कोशिश करते है।  वे दूसरों काम सौंपना नहीं चाहते, क्योंकि उन्हें लगता है, ' मैं इसे ज्यादा अच्छी तरह से कर सकता हु।'  उन्हें यह समझ में नही आता है कि बड़ी सफ़लता पाने के लिए उन्हें दूसरों को काम सौंपना ही होगा, चाहे उन्हें यह पसंद हो या न हो।  प्रगती के राह में एक ऐसा मोड़ आता है, जहाँ भविष्य में प्रगती करने के लिए दूसरों को काम सौंपना ही जरूरी हो जाता है।  इसलिए बेहतर होगा कि आप काम सौंपने की कला सीख लीजिए। 

     काम सौंपने के लिए आपको सिर्फ़ इतना करना है कि आप किसी सही व्यक्ति को खोजकर उसे काम सौंप दे।  यानी कि ऐसा व्यक्ति चुनें, जिसमें उस काम को अच्छी तरह से करने की क्षमता और इच्छा हो।  फिर उसे बता दे कि उसे क्या करना है, कैसे करना है और कब करना है।  इसके बाद आप सौंपे गए काम और उसके पूर्ण होने की तारीख को अपनी डायरी में लिख लीजिए।  delegation ( डेलिगेशन ) या काम सौंपने का तरीक़ा इतना ही आसान है। 

     सौंपे गए काम की प्रगती की निगरानी ( देखभाल ) करना अच्छी बात है, लेकिन यह भी ध्यान रखे कि ज्यादा निगरानी में आपका समय बर्बाद होता है और सामने वाले को बुरा भी लग सकता है कि आप उसकी क्षमता या योग्यता पर भरोसा नही कर रहे है। 

     काम सौंपने की कला में निपुण होने के लिए सिर्फ़ दो चीज़ों की जरूरत है - यह पता लगाना कि कौन से काम सौपे जा सकते है और किसे।  बस इतनी सावधानी बरतें कि अत्यंत महत्त्वपूर्ण काम दूसरों को सौंपने के बजाय खुद करें।  

              आमिर लोग समय में निवेश करते है, गरीब लोग धन में निवेश करते है। 
                                                - वॉरेन बफ़ेट

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26 February 2015

सापेक्षता के नियम को समझें।


     सापेक्षता का नियम समय के संदर्भ में भी बहुत महत्त्वपूर्ण है।  समय वही रहता है, बस हमारा नजरिया बदल जाता है।  आपने खुद देखा होगा, जब बच्चे जब कार्टून देखते है, तो उन्हें भूख-प्यास का एहसास ही नही होता, उन्हें पता ही नही चलता कि कब दो घंटे गुज़र गए।  दूसरी ओर, जब बच्चे पढ़ते है, तो उन्हें सौ काम याद आ जाते है और पंद्रह मिनिट में उन्हें ऐसा लगता है कि बहुत समय हो गया। यह सापेक्षता के नियम के कारण होता है। 

     अपना प्रिय और मनपसंद काम करते समय आपको समय का एहसास ही नही होता, क्योंकि तब आप लय होते है, जिसे मनोवैज्ञानिक फ़्लो में रहना कहते है।  इस समय आप जो काम करते है, वह सहज ही बेहतरीन होता है, क्योंकि आप बिना कोशिश किए सर्वश्रेष्ठ कार्य करते है।  बेहतर यही कि आप सापेक्षता के नियम को ध्यान में रखकर अपने काम को दिलचस्प बनाने के तरीक़े खोजें, ताकि आप लय में काम कर सकें।  अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम को दिलचस्प बनाए और दिलचस्प मानिए। 

मान लीजिए कि आप सेल्समेन है और आपको अपने काम से नफ़रत है।  ऐसे में आपका 1 घंटे काम करने से थक जाएंगे और सोचेंगे कि बाकी का काम आप कल कर लेंगे।  दूसरी ओर, यदि आप अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते है, अपने पिछले रिकॉर्ड से प्रतिस्पर्धा करते है आज एक नया कीर्तिमान बनाना चाहते है, तो  आपको यह दिलचस्प खेल लगेगा, जिससे आपमें नई ऊर्जा का संचार होगा।  कुछ दिलचस्प करें, जिसमे\जिसमें आपका मन लगे।  यदि आपका काम नीरस है कि उसे दिलचस्प बनाने का कोई उपाय ही नही है, तो या तो काम बदल ले या फिर किसी विशेषज्ञ से उसे दिलचस्प बनाने का कोई उपाय पूछ लें।  आप काम के अंत में खुद को पुरस्कार का लालच भी दे सकते है।  

     यदि आपको पता होगा कि काम पूरा होने पर आप टेबल पर पैर रखकर हॉट कॉफ़ी पिएँगे या कोई फ़िल्म देखेंगे या पसंदीदा डिनर करेंगे, तो इससे आपको प्रेरणा मिलेगी और काम में दिलचस्पी भी बढ़ेगी।  इतना ही क्यों, अपने आर्थिक लक्ष्य को याद करते रहे और यह कल्पना करें कि उसे प्राप्त करने पर आपका जीवन कितना सुखमय हो जाएगा।  लक्ष्य हमारे पैरों को आगे बढ़ने की शक्ति देते है और हमें कष्ट सहन करने का संबल प्रदान करते है।  यदि आपका सपना पर्याप्त शक्तिशाली है, तो यह आपको लगा तार आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहेगा। 

     देखिए, सापेक्षता का सिद्धांत कभी न भूले !  दूसरों को लगेगा कि आप दिन-रात ख़ाम ख्वाह मेहनत कर रहे है, जबकि आपको उनकी तरह मज़े करने चाहिए, लेकिन आपको दिखेगा कि आप दिन रात मेहनत करके अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहे है और वह समय जल्द ही आएगा, जब आप अपनी मनचाही मंज़िल पर पहुँच जाएंगे और उसके बाद सारी जिंदगी मज़े करेंगे।  यही सापेक्षता है।  एक को वर्तमान (present) कष्ट दिखता है, दूसरे को भावी सुख।  यह आप पर निर्भर है। 
                                 
                                                         ALL THE BEST

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25 February 2015

बुरी लतों से बचिए।


     यहाँ हम शराब और सिगरेट के गुण-दोषों पर बातचीत नहीं करेंगे, क्योंकि यह स्वास्थ का विषय है।  हम तो उनका विशलेषण समय के संदर्भ में करेंगे।  शराब और सिगरेट आपके शरीर के लिए तो घातक है ही, आपके समय समय के लिए बहुत घातक है।  लगभग यह एक अनुमान है कि युवा वर्ग एक सिगरेट पीने में लगभग आधा घंटे का समय बर्बाद करते है।  सिगरेट पीने में तो केवल पॉँच मिनिट लगते है, लेकिन इसकी जुगाड़  करने और इसका माहौल बनाने में समय लग जाता है।  हमारे समाज में अभी घर पर सिगरेट पीने का रिवाज नही है, इसलिए युवक पान की दुकान तक जाते है, फिर वहा सिगरेट पीते समय बातचीत करने लगते है और यार दोस्तों के साथ फालतू की बातों में समय कैसे बीत जाता है, उन्हें पता ही नही चलता।

     शराब तो समय को और भी ज्यादा बर्बाद करती है।  अगर यह कहा जाए कि शराब समय को बर्बाद करने वाली सबसे बुरी लत है, तो अतिशयोक्ति नही होगी।  देखिए, एक तो शराब पीने में बहुत समय लगता है।  दूसरे, पीने के बाद आदमी किसी काम का नही रहता।  वह न कुछ कर सकता है, न किसी जगह जा सकता है, न ही फ़ोन पर ढंग से बात कर सकता है।  शराब पीने के बाद दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ती है, सो अलग।  यही नहीं, शराब पीने से अगला दिन भी ख़राब होता है, क्योंकि इसकी वजह से अगली सुबह सिरदर्द हो जाता है, जो दोपहर तक चलता है।  शराब की आदत छोड़ने से हमारा बहुत सा समय बच जाता है।

     सिगरेट और शराब के अलावा भी कई बुरी लतें होती है, जो आपका बहुत सा समय बर्बाद करती है। ये मनोवैज्ञानिक आदते होती है, जिनमें उलझकर आप अपना समय खुद ही बर्बाद करते है।  एक मुख्य आदत है दूसरों की बुराई करने या इधर की बाटे उधर करने की आदत।  यह आदत समय प्रबंधन के लिहाज़ से बुरी है, क्योंकि इसमें आपका बहुत समय बर्बाद होता है।

     बहस या लढाई करने की आदत में भी आपका बहुत समय बर्बाद होता है, तनाव होता है सो अलग, इसलिए इन आदतों से बचिए।  बड़ बोलेपन से भी बहुत समय बर्बाद होता है।  इस आदत को दूर करने के लिए सिकंदर महान के पिता फ़िलिप द्वितीय की घटना को हमेशा याद रखिए।  सभी मुख्य यूनानी शहरों पर कब्ज़ा करने के बाद फ़िलिप द्वितीय ने लैसिडेमान पर लढ़ाई करने का फैसला किया और वह के लोगों को यह चेतावनी भरा एक पत्र भेजा, 'तुम्हें सलाह दी जाती है कि तुम अविलंब समर्पण कर दो, क्योंकि मेरी सेना तुम्हारे शहर में घुस गई, तो मै तुम्हारे खेत नष्ट कर दूंगा, तुम्हारे लोगों को मार डालूँगा और तुम्हारे शहर को जलाकर राख कर दूँगा।'  लैसिडेमान के लोग चाहते, तो इसका मुँहतोड़ जवाब दे सकते थे लेकिन उन्होंने जवाब में सिर्फ़ एक शब्द लिखकर भेजा, 'अगर!' फ़िलिप को सन्देश मिल गया और उसने लैसिडेमान पर लढाई का इरादा त्याग दिया।        

                               आप देर कर सकते है, लेकिन समय नही करेगा। 
                                                         - बेंजामिन फ्रैंकलिन



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19 February 2015

अगले दिन की योजना बनाकर अवचेतन मन की शक्ति का लाभ लीजिए।


    आदर्श स्थिति तो यह रहती है कि आप अगले दिन की योजना एक दिन पहले रात को बना लीजिए।  एक दिन पहले योजना बनाने का लाभ यह होता है कि आपको अवचेतन मन की शक्ति का लाभ मिल जाता है।  यह साबित हो कि हमारे भीतर दो मन होते है : - चेतन मन और अवचेतन मन।  चेतन मन यानि वह मस्तिष्क, जो सोचता है और जिसके बारे में हम जागरूप होते है।  दूसरी ओर, हमारे भीतर एक अवचेतन मन भी होता है, जो हमें दिखाई तो नहीं देता है, लेकिन यह हमें जल्दी से और सही तरीक़े से काम पूरा करने के नए-नए तरीक़े सुझा सकता है। 

     क्या कभी ऐसा हुआ था कि रात को आपको सोचने पर भी किसी सवाल का जवाब याद नहीं आ रहा था, लेकिन सुबह होते ही आपको अपने आप जवाब मिल गया, बिना सोचें हुए सब कुछ सही हो गया ?  ऐसा आपको अवचेतन मन के कारण हुआ था।  जब रात को आप और आपका चेतन मन दोनों ही सो रहे थे, तो अवचेतन मन ने उस समस्या पर काम किया और सुबह होते ही जवाब आपके सामने पेश कर दिया।  यह चेतन मन के लिए मुश्किल कामों की ऑउटसोर्सिंग की तरह है।  जो काम चेतन मन केलिए मुश्किल है, उन्हें आपका अवचेतन मन चुटकियों में कर सकता है, इसलिए अवचेतन मन की शक्ति का लाभ लें और एक रात पहले ही अगले दिन की योजना बना लीजिए। 

     यदि आप वास्तव में समय प्रबंधन करना चाहते है, तो आपको केवल चेतन मन का नहीं, बल्कि अवचेतन मन का भी इस्तेमाल करना होगा।  यदि आपको ऐसे नए-नए तरीक़े सुझाएगा, जिनकी बदौलत आप कम समय से ज्यादा काम करने के उपाय खोजने में क़ामयाब होंगे।  एक रात पहले योजना बनाने से यह लाभ होता है कि रात भर में आपकी कार्यसूची आपके अवचेतन मन में समा जाती है।  अगले दिन आपको अपने आप सही क्रम सूझ जाता है और आप खुदबखुद कार्यसूची के मुताबिक काम करने लगते है।  हो सकता है कि आपको काम करने का नया तरीका भी सूझ जाए। 

     कई बार तो काम इसलिए अधूरा छूट जाता है, क्योंकि हम काम के नहीं, समय के संदर्भ में सोचते हैं।  जैसे, मै यह काम एक घंटा तक करूँगा।  इससे बेहतर तरीका यह है, मै इस काम का यह हिस्सा एक घंटे में पूरा करूँगा।  अब अगर वह हिस्सा सवा घंटे में निबटता ( पूरा होता ) है, तो सवा घंटा एक काम करिए।  सिर्फ समय भरने केलिए काम करने के बारे में न सोचें, काम पूरा निबटाने के बारे में सोचिए। 

     इसका एक उदाहरण देखिए -

     एक विद्यार्थी सोचता है, मैं एक घंटे तक maths पढूंगा।  दूसरा विद्यार्थी सोचता है, मै सवाल करूँगा।  अब आप ही सोचिए, किसकी प्रगति ज्यादा होगी ?  दूसरे विद्यार्थी की।  इसलिए, क्योंकि उसने काम का स्पष्ट लक्ष्य बनाया था।  तो आप भी इस विद्यार्थी की तरह काम का स्पष्ट लक्ष्य बनाइए और सफ़लता हासिल कर लीजिए। 

       सफ़लता का सूत्र सरल है : - सही काम करे, सही तरीक़े से करें, सही समय पर करें। 
                                                                    - अरनॉल्ड एच. ग्लासगो   

                                                      !!! ALL THE BEST !!!

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18 February 2015

आलस से बचिए।


     समय बचाने के लिए आपको आलस से बचना चाहिए।  जब भी सामने कोई मुश्किल काम आता है, तो हम आलस करने लगते है और उसे टाल देते है।  लेकिन टालमटोल करने के अलावा भी आलस के कई कारण होते हैं।  आलस का एक अहम कारण वह  है, जिसे अधिकांश लोग अनदेखा कर देते है :- जरुरत से ज्यादा भोजन करना।

     जब आप आवश्यकता से अधिक भोजन करते है या ज्यादा तला-भुना भोजन करता है, तो आपकी ऊर्जा में कमी आ जाती है और आपकी एकाग्रता में बाधा आती है।  आलस में ज्यादा गलतियाँ करते है और टालमटोल करने या फिर जैसे-तैसे काम निबटाने के चक्कर में रहते है।  इससे आपके काम की गुणवत्ता पर बुरा असर पड़ता है।  यदि आप शरलॉक होम्स के दीवाने है, तो ये बात आपको जल्दी समझ आ जाएगी, क्योंकि जब शरलॉक होम्स कोई जटिल समस्या सुलझाने में जुटता था, तो खाना-पीना छोड़ देता था।  उसका मानना था कि भोजन करने के बाद ख़ून का प्रवाह पेट की तरफ हो जाता है, जिससे दिमाग़ के काम करने की रफ़्तार धीमी हो जाती है।

     यह स्पष्ट समझ लीजिये कि यहाँ भोजन करने में लगने वाले समय की बात नहीं हो रही है, ज्यादा भोजन करने के परिणामों की बात हो रही है।  भोजन करने में तो कम समय लगता है, लेकिन भोजन के कारण उत्पन्न आलस के कारण ज्यादा समय बर्बाद होता है।  क्या आपने कभी देखा है कि दिन में खाना खाने के बाद विद्यार्थियों को नींद के झोंके आने लगते हैं रात को अगर ज्यादा खाना खाले लें, तो सीधे बिस्तर पर जाने की इच्छा होती है ?  आपने ख़ुद भी महसूस किया होगा कि रेस्तरां में या किसी विवाह समारोह में भोजन करने के बाद आपको पेट भारी लगता है और आप जल्दी से जल्दी सो जाना चाहते हैं।

     क्या आपने कभी सोचा है कि हम सुबह सबसे अच्छी तरह काम क्यों कर सकते हैं ?  एक कारण तो यह है कि उस समय आराम कर लेने के बाद शरीर थका हुआ नही रहता है।  दूसरा कारण यह है कि सुबह oxygen ज्यादा रहता है और तीसरा कारण यह है कि उस वक़्त हमारा पेट खाली होता है।  पेट खाली रहने से दिमाग़ ज्यादा तेज़ी से चलता है, इसलिए हमें एक ही बार में ज्यादा भोजन करने से बचना चाहिए, ताकि हम पर आलस सवार न हो।  नियमित अंतराल पर कम आहार ग्रहण करना स्वास्थ केलिए सबसे अच्छा माना जाता है।  जब आप कम खाते है, तो आपको आलस नही आता और आपकी ऊर्जा व् एकाग्रता का स्तर बना रहता है।

     आलस के कारण इंसान अपने महत्त्वपूर्ण काम नहीं कर पाता है, इसलिए अपनी ऊर्जा के स्तर को बनाए रखिये और आलस नाम के महा रोग से बचिए।

                   आलस मीठा होता है, लेकिन इसके परिणाम बेरहम होते हैं। 
                                                   - जॉन क्विन्सी एडम्स 

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17 February 2015

सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले करिए।


     अक्सर हमारी दिनचर्या इस तरह की होती है कि हमारे सामने जो काम आता है, हम उसे करने लग जाते है और इस वजह से हमारा सारा समय छोटे छोटे कामों को निपटाने में ही चला जाता है।  हमारे महत्त्वपूर्ण काम इसलिए नही हो पाते, क्योंकि हम महत्त्वहीन कामों में उलझे रहते है।  महत्त्वाकांक्षी व्यक्ति को इस बात में सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि सफ़लता पाने केलिए ये आवश्यक है कि महत्त्वपूर्ण काम पहले किये जाए।  हमेशा याद रखे कि सफ़लता महत्त्वहीन नही, बल्कि महत्त्वपूर्ण कामों से मिलती है, इसलिए अपनी प्राथमिकताएँ स्पष्ट रखें और अपना समय महत्त्वहीन कामो में न गवाएं।

समय के संबंध में अपनी प्राथमिकताएं तय करने का एक उदाहरण देखिये -

     'एक मशहूर संगीतज्ञ जब वायलिन बजाना सीख रही थी, तो उन्होंने पाया कि उनकी प्रगति संतोषजनक नहीं है।  कारण खोजने पर उन्हें पता चला कि संगीत का अभ्यास करने से पहले घर साफ करने, सामान व्यवस्थित करने, खाना पकाने आदि कार्यों में उनका बहुत समय लग जाता है, इसलिए उन्हें वायलिन सीखने के लिए कम समय मिल पाता है।  यह जानने के बाद उन्होंने संकल्प किया कि क्योंकि संगीत उनके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण है, इसलिए वे सबसे पहले संगीत का अभ्यास करेंगी, बाकी सारे काम उसके बाद करेंगी।  खुद को इस तरह अनुशासित करने के बाद उन्होंने संगीत के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की, क्योंकि अब वे अपना सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले कर रही थी।'

     इस उदहारण से यह स्पष्ट हो जाता है कि हर महत्वा कांशी व्यक्ति को अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम सबसे पहले करने चाहिए, लेकिन इसके लिए उसे यह पता लगाना होगा कि सबसे महत्त्वपूर्ण काम है कौन से।  उनके पास उनकी प्राथमिकताओ की स्पष्ट योजना होना चाहिए।  ऐसा करना बहुत ही आसान है।  एक डायरी में ए (A), बी (B) और सी(C) शीर्षक के तीन कॉलम बना लें।  ए (A) कॉलम में अपने सबसे महत्त्वपूर्ण काम रखें, जिन्हें आप अनिवार्य मानते हैं।  बी (B) कॉलम में ऐसे काम रखें जो अनिवार्य तो नहीं हैं, परंतु महत्वपूर्ण हैं।  सी (C) कॉलम में ऐसे सामान्य काम रखें, जो न तो अनिवार्य हैं, न ही महत्त्वपूर्ण।

     


 दिनांक :-
ए (अनिवार्य कार्य )    बी (महत्वपूर्ण कार्य)       सी (सामान्य कार्य )
 1.                               1.                                1.
 2.                               2.                                2.
 3.                               3.                                3.

     दिन में सब से पहले ए कॉलम के पहले काम यानी ए1 काम से करें, जो सबसे अनिवार्य काम होगा।  उसे पूरा करने के बाद आप इसी कॉलम के दूसरे काम करने में जुट जाए और इस तरह ए कॉलम के सारे काम निपटा लीजिये।  ए कॉलम के बाद बी कॉलम के काम शुरू करिए और इसके बाद समय बचने पर ही सी कॉलम के कामों की ओर जाए।

     महत्त्व के क्रम में अपनी प्राथमिकताओ की कार्य सूची बनाना बहुत महत्त्वपूर्ण होता है।  हमें रॉबर्ट जे. मैकैन की यह बात हमेशा याद रखना चाहिए, 'अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न हो पाने का कारण यह है कि हम छोटी चीजों को पहले करने में अपना समय बर्बाद कर देते है।' 

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16 February 2015

सुबह जल्दी उठिए।


  सुबह का पहला घंटा पुरे दिन की दिशा तय करता है
                                      - हेनरी वार्ड बीचर

     'जो जल्दी सोते है,जल्दी उठते है, उनके पास स्वास्थ, पैसा और बुद्धि रहती है।'  इस कहावत को आज जितना नजर अंदाज किया गया है, उतना किसी दूसरी कहावत को नही किया गया।  यह बात मै अनुभव से जानता हू।  कभी मै भी रात को २-३ बजे सोकर सुबह ८-९ बजे उठता था और अगर आप आधी रात के बात सोते है, तो आप भी मेरी ही श्रेणी में आते है।  time management की दॄष्टि से यह बिलकुल ही गलत है, क्योंकि सुबह देर से उठने पर आपके पास दूसरे कामों के लिए तो समय रहता है लेकिन अपने लिये समय नहीं रहता है।

     लोग यह तर्क दे सकते है कि सुबह उठना बूटो की बात नहीं है, रात की शांति में काम ज्यादा अच्छी तरह होता है और रात को वे चाहे जितनी देर तक काम कर सकते है।  लेकिन तर्क लचर है।  सुबह ४ बजे उठने पर भी शांति ही रहती है और उसमें काम अपेक्षा कृत ज्यादा अच्छी तरह होता है। मुख्य बात यह है कि उस समय काम की गति भी तेज़ होती है, क्योंकि शरीर और दिमाग़ दोनों भी तरो ताज़ा होते है।  रात के वातावरण में oxygen की मात्रा कम हो जाती है, इसलिए आपका दिमाग़ कम चल पाता है और दिमाग़ी काम के लिए रात का समय आदर्श नहीं होता।  आदर्श समय तो सुबह का ही रहता है, जब वातावरण oxygen से भरपूर रहता है।  यकीन न हो, तो सुबह ६ बजे और शाम ६ बजे उसी सड़क पर घूम कर देख लीजिए।

     एक बात जान लीजिए, समय के सर्वश्रेष्ठ उपयोग में सबसे बड़ी दिक्क़त दूसरों की तरफ़ से आती है और सुबह यह दिक्कत सबसे कम होती है,इसलिए सुबह के १ घंटे में आप जितना काम कर लेते है, उतना दोपहर में ३ घंटे में हो पाएगा।  सुबह mobile का tension भी नहीं रहता, अख़बार भी देर से आता है, बच्चे भी देर से उठते है, इसलिए आप पूरी एकाग्रता से काम कर सकते है। 

     आदर्श स्थिति में तो नियम यह है कि सूरज उगने से २ घंटे पहले उठे और सूरज डूबने के २ घंटे बाद सो जाए।  जब आप सुबह ४ बजे उठते है, तो आपके पास समय ही समय रहेगा।  ऑफिस जाने से पहले भी आपके पास ४-५ घंटे का समय रहेगा।  इस दौरान आप व्यायाम कर सकते है, पुरे दिन की योजना बना सकते है और अपने महत्त्वपूर्ण काम निपटा सकते है।  दूसरी ओर, जल्दी सोने की आदत से भी आप बहुत समस्याओं से मुक्ति पा लेते है।  आपको देर रात की पार्टिओ से मुक्ति मिल जाती है। इसके अलावा, आपकी जीवन शैली ज्यादा स्वस्थ हो जाती है।

     हमारे पूर्वजों की जीवनशैली ज्यादा स्वस्थ इसलिए थी, क्योंकि वे प्रकृति के करीब थे।  वे न सिर्फ प्राकृतिक वातावरण में रहते थे, बल्कि प्रकृति की लय में कार्य करते थे।  सुबह का वातावरण इतना पवित्र और शांत रहता था कि ऋषि-मुनि ब्रह्म मुर्हुत में भजन-पूजन करते थे।  वे मुर्गे की बाँग के साथ उठते थे और चाँद निकल ने पर सो जाते थे।  इस तरह वे अपने शरीर को प्रकृति के सांमजस्य में रख रहे थे।  आज आधुनिकता की होड़ में कृत्रिमता का माहौल इतना बढ़ चूका है कि प्रकृति से मनुष्य का सारा संपर्क ही टूट चूका है।  रात को देर तक जागने से मनुष्य की प्राकृतिक लय ख़त्म हो जाती है और वह सुबह देर से उठता है।  नतीजा यह होता है कि उसका हाजमा ख़राब होता है, कब्ज़ की शिकायत रहती है, ताज़गी और स्फूर्ति का अभाव होता है और दिन भर उसके शरीर में आलस भरा रहता है।


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13 February 2015

कर्म में जुट जाए।


                           समय की रेत पर कदमों के निशान बैठकर नही बनाए जा सकते।
                                                                          - कहावत

     बेहतरीन लक्ष्यों और सर्वश्रेष्ठ योजनाओं के बावजूद आप असफल हो सकते है, बेशर्ते आप उन पर आप अमल न करे।  कर्म ही वह जादुई तत्व है, जो आपको स्थायी सफ़लता दिलाता है।

     हम सब जानते है कि बिना मेहनत किये हम सफ़ल नही  हो सकते, परन्तु आष्चर्यजनक बात यह है कि इसके बावजूद हम मेहनत से जी चुराते है, काम को टालते रहते है, मूड ना होने का बहाना बनाते है, समय या संसाधन की कमी का तर्क देते है यानि ,काम करने के अलावा सब कुछ करते है।  इस संदर्भ में तुलसीदास जी के इस दोहे को याद रखिए, 'सकल पदारथ है जग माहीं।  करमहीन नर पावत नाही।'  यानी इस संसार में सारी चीज़ें हासिल की जा सकती है, लेकिन वे कर्महीन व्यक्ति को नही मिलती है।   

      काम से जी चुराने का मुलभुत कारण यह है कि हम स्वभाव से आलसी होते है और हमारा मन हमें मनोरंजन या आनंद की आकर्षक राह की तरफ़ खींचता है।  हम यह भूल जाते है कि सफ़लता की राह मुश्किलों से भरी होती है, जिस पर चलने का श्रम करने के लिए हमें अपने मन पर काबू पाना होगा, अपनी इच्छा शक्ति को दृढ़ करना होगा और लक्ष्य की तरफ लगातार बढ़ना होगा।  हम यह भी भूल जाते है कि सफल व्यक्ति अपने मूड के दास नही बल्कि उसके स्वामी होते है। 

      इस संबंध में सबसे अच्छी सलाह यह है, 'कोई काम शुरू करते समय अपने मूड से सलाह न ले।'  यानि अपने मूड के हिसाब से नही, बल्कि अपने लक्ष्य और योजना के अनुसार काम करें।  विश्वविख्यात नाटक कार जॉर्ज बनार्ड शॉ का कही बार लिखने का मूड नही होता था।  लेकिन मूड हो या ना हो लेकिन वे लिखते थे, क्योंकि उन्होंने महान साहित्य कार बनने के अपने लक्ष्य को कभी अपनी नज़रों से ओझल नहीं होने दिया।  अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने संकल्प किया कि वे हर दिन ५ पेज लिखेंगे, चाहे उनका मूड कैसा भी हो।

     अगर आप भविष्य में सफलता की फ़सल काटना चाहते है, तो आपको उसके लिए बीज आज बोने होंगे।  अगर आप आज बीज नही बोएंगे, तो भविष्य में फ़सल काटने की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ?  पूरी सृष्टि कर्म और फल के सिद्धांत पर चलती है, इसलिए आपको अपने कर्म के अनुपात में ही फल मिलेंगे।

     यदि आप सफलता चाहते है, तो कर्म में जुट जाए और तब तक जुटे रहें, जब तक कि आप सफल न हो जाए।  यदि आप समय का सर्वश्रष्ठ उपयोग करना सीख लेते है, तो आगे चल कर समय आपको वह वस्तु दे देगा, जिसे आप प्रबलता से चाहते है - सम्मान, सफलता, धन, सुख, या फिर जो भी आप चाहते है।


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